चंडीगढ़ सेक्टर-9डी स्थित निजी कंपनी की होंडा सिटी कार हड़पने के मामले में फंसे सीबीआई इंस्पेक्टर को कोर्ट ने पांच साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्मानें की सजा सुनाई है।
दोषी इंस्पेक्टर रविंद्र सिंगला को एक दिन पहले ही सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दे दिया था जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि इस मामले में नामजद एक अन्य आरोपी परमजीत को बरी किया जा चुका है और एक अन्य आरोपी का निधन हो चुका है।
दोषी इंस्पेक्टर को सीबीआई कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत सजा चार वर्ष व 20 हजार जुर्माना, धारा 13 (1) (डी) व धारा 13 (2) के तहत पांच वर्ष की कैद 50 हजार रुपये जुर्माना और आईपीसी की धारा 384 के तहत तीन वर्ष की कैद व 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
इस मामले के संबंध में चंडीगढ़ सेक्टर-9डी स्थित मेसर्स नेक्टर लाइफसाइंसेज लिमिटेड कंपनी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एचआर एवं मैनेजमेंट) टीके शर्मा द्वारा सीबीआई इंस्पेक्टर रविंद्र सिंगला के खिलाफ शिकायत दी गई थी। आरोप लगाया था कि जुलाई 2015 में रविंद्र सिंगला ने खुद को चंडीगढ़ सीबीआई में तैनात इंस्पेक्टर बताया। उसने उनके साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने और जब भी आवश्यकता हो, उनकी मदद करने के लिए कहा। कुछ दिनों बाद इंस्पेक्टर ने फिर से कंपनी से संपर्क किया और उनसे कहा कि उनकी आधिकारिक गाड़ी खराब हो गई है और उन्हें नई दिल्ली में निर्धारित एक अत्यंत जरूरी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गाड़ी की आवश्यकता है। कंपनी ने उन्हें नई होंडा सिटी गाड़ी दी लेकिन कई दिनों तक इंस्पेक्टर वह गाड़ी वापस नहीं की। बार-बार गाड़ी वापस मांगने पर इंस्पेक्टर ने धमकी दी कि वह उनकी गाड़ी को उनके रिश्तेदार या उसके नाम दर्ज करवा दें, अन्यथा वह उसे किसी मामले में फंसवा देंगे। सीबीआई ने इस मामले में इंस्पेक्टर सहित परमजीत और प्रमोद कुमार के खिलाफ केस दर्ज उन्हें गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली सीबीआई की टीम ने इंस्पेक्टर रविंद्र सिंगला को सेक्टर-30 से गिरफ्तारी करने सहित वहीं से कंपनी की गाड़ी को भी बरामद किया। इस मामले में इंस्पेक्टर को कोर्ट ने दोषी करार दिया था जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था।
कोर्ट ने आदेशों में भ्रष्टाचार को लेकर की सख्त टिप्पणी
इस मामले में सीबीआई कोर्ट ने अपने आदेशों में लिखा कि इंस्पेक्टर रविंद्र सिंगला ने भ्रष्ट आचरण में लिप्त होकर केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी प्रमुख संस्था को कमजोर किया है, जिसमें वे खुद सेवारत थे। आदेशों में लिखा कि लोक सेवकों द्वारा भ्रष्टाचार इस राक्षसी स्तर पर पहुंच गया है कि जिन संस्थाओं को जनता की सेवा के उद्देश्य से बनाया गया है, वे उसी उद्देश्य को विफल कर रही हैं। लोक सेवकों द्वारा भ्रष्टाचार वास्तव में सार्वजनिक संस्थानों के कामकाज को पंगु बना रहा है, जिससे राज्य की लोकतांत्रिक राजनीति में बाधा उत्पन्न हो रही है। कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में भ्रष्टाचार की वजह से आर्थिक मंदी आई है। उच्च पदस्थ लोगों द्वारा बेखौफ होकर किया जा रहा भ्रष्टाचार ही इस स्थिति का कारण है। अगर किसी से पूछा जाए कि हमारे समाज की प्रगति में बाधा डालने वाला एकमात्र कारक कौन सा
है, तो निस्संदेह वह भ्रष्टाचार है। वास्तव में, भ्रष्टाचार कानून के शासन के मूल सिद्धांतों को नष्ट कर देता है। भ्रष्टाचार राष्ट्र का दुश्मन है और भ्रष्ट लोक सेवकों का पता लगाना और उन्हें दंडित करना अति आवश्यक है।