एक लाख रुपये रिश्वत लेते IFS वीरेंद्र चौधरी गिरफ्तार
रिश्वत लेते दबोचे गए आईएफएस वीरेंद्र चौधरी के खिलाफ जल्द ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई की रिपोर्ट आते ही चौधरी के निलंबन के आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
चंडीगढ़ पाल्यूशन कं ट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) के सदस्य सचिव वीरेंद्र चौधरी की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई खुलासे किए हैं। होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल के पास चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के चेयरमैन का भी कार्यभार हैं। इसके अलावा चीफ कंजर्वेटर फोरेस्ट आईएफएस संतोष कुमार इस कमेटी के वाइस चेयरमैन हैं।
सूत्रों ने बताया कि मेंबर सेक्रेटरी वीरेंद्र चौधरी ने होम सेक्रेटरी व वाइस चेयरमैन की मंजूरी के बगैर करीब 38 प्राइवेट फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इनमें कई आरा मिल मालिक को भी एनवायरमेंट व अन्य क्लीयरेंस न लेने के चलते नोटिस जारी किए गए थे। सूत्रों ने बताया कि आईएफएस बीरेद्र चौधरी ने अपने लेवल पर ही इन आरा मशीनों और प्राइवेट फर्म को नोटिस जारी किए थे।
वीरेंद्र चौधरी ने बिना मंजूरी 38 निजी फर्म को भेजे थे नोटिस
एक लाख रुपये रिश्वत लेते IFS वीरेंद्र चौधरी गिरफ्तार
इस मामले में जब सीपीसीसी के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार से जानकारी ली गई उन्होंने कहा कि ग्रीन टाइप की इंडस्ट्री पर कार्रवाई करने के लिए आईएफएस बीरेंद्र चौधरी को कार्यभार सौंपा गया थ। जिन इंडस्ट्री या प्राइवेट फर्म को शोकॉज नोटिस जारी किए गए। वे सभी ग्रीन इंडस्ट्री थी।
इन प्राइवेट फर्म व आरा मशीनों को शोकॉज नोटिस जारी करते समय किसी से अनुमति नहीं ली गई। वहीं, इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में आरा मशीन के शिकायतकर्ता राजिंदर कुमार की शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि आईएफएस बीरेंद्र चौधरी ने एनवायरमेंट क्लीयरेंस व कंसेंट देने के लिए चार प्राइवेट फर्म मालिकों से 25-25 हजार रुपये की डिमांड की थी।
चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने हाल ही में 116 यूनिट को नोटिस जारी किए थे। इन यूनिट को भेजे गए नोटिसों की भी अब जांच की जाएगी। इस समय शहर के औद्योगिक क्षेत्र फे ज-1 व 2 में करीब 2 हजार इंडस्ट्रियल यूनिट है। इन 2 हजार यूनिट को रेड, ऑरेंज और ग्रीन कैटगरी में बांटा गया है। सीपीसीसी ने रेड कैटगरी में अत्यधिक प्रदूषण इकाई को शामिल किया है। वहीं, मध्यम प्रदूषण इकाई को ऑरेंज कैटगिरी और बिलकुल भी प्रदूषण न करने वाली इकाई को ग्रीन कैटगिरी में शामिल किया है।