चंडीगढ़ सुप्रीम कोर्ट से वेंडरों को फिर राहत नहीं मिली है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने रॉक गार्डन के वेंडरों का केस डिसमिस कर दिया। जो वेंडर अब तक वेंडिंग जोन में नहीं गए थे, उन्हें जाना होगा। अभी तक कुछ वेंडर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे। इससे पूर्व 27 नवंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने वेंडरों का केस खारिज कर दिया था।
19 नवंबर को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम को आदेश जारी किए थे कि 5 दिसंबर तक हर हाल में सेक्टर- 1 से लेकर 6 तक और सेक्टर- 17 को वेंडिंग जोन मुक्त बनाना है। उसके बाद नगर निगम ने नोटिस जारी करना शुरू कर दिए। साथ ही वेंडरों को साइट अलॉटमेंट लैटर भी जारी कर दिए, लेकिन कुछ वेंडरों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। उनका कहना था कि हम हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। इस बीच नगर निगम ने वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के लिए पब्लिक नोटिस जारी कर दिया।
निगम से स्पष्ट लिखा कि 5 दिसंबर तक जो वेंडर शिफ्ट नहीं होंगे, हाईकोर्ट के निर्देशानुसार उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। चंडीगढ़ रेहड़ी फड़ी यूनियन के अध्यक्ष राम मिलन गौड़ के नेतृत्व में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। 27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि मामला फिलहाल पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट केपास है। इसलिए मामले में हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। जिन वेंडरों को समस्या है, उन्हें हाईकोर्ट में ही जाना चाहिए। वहां जाकर अपनी समस्या बतानी चाहिए। उसके बाद रॉक गार्डन के वेंडरों ने फिर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया।
अब वेंडिंग जोन पर लगेगी भीड़
अभी तक वेंडर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि वेंडरों को इस बार कुछ राहत मिल सकती है। इसलिए अब तक वेंडर वेंडिंग जोन में शिफ्ट नहीं हुए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट होना पड़ेगा। अब वेंडिंग जोन में फिर से भीड़ होने लगेगी।
वेंडिंग फीस जमा का समय बढ़ाने की मांग
नगर निगम में पूरे दिन समस्याओं को लेकर वेंडरों की भीड़ लगी रही। वेंडरों की मांग थी कि उनके लाइसेंस का लॉक खोल दिया जाए, ताकि फीस जमा कर सकें। समाज विकास अधिकारी विवेक त्रिवेदी ने स्पष्ट मना कर दिया कि अब लॉ नहीं खोला जाएगा। इसके लिए टाउन वेंडिंग कमेटी के सामने मामला रखा जाएगा। यदि वहां से रियायत देने का सुझाव मिलेगा तो तो आगे लॉक खोला जा सकता है।