हरियाणा के नूंह क्षेत्र में सांप्रदायिक झड़पों के बाद भड़की हिंसा के बाद हरियाणा सरकार द्वारा इमारतों को गैरकानूनी बताते हुए इन पर बुलडोजर चलाने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका में इमारतों के वैध दस्तावेज के बावजूद कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मुआवजा देने का निर्देश जारी करने की अपील की गई है।
अकील हुसैन व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मेवात क्षेत्र में अगस्त 2023 में हिंसा हुई थी। इस हिंसा के बाद हरियाणा सरकार ने मेवात क्षेत्र में मौजूद कई इमारतों को निशाना बनाया और बुलडोजर चलवा दिया। यह कार्रवाई करते हुए लोगों को सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया। मनमाने ढंग से याचिकाकर्ता को कोई पूर्व सूचना दिए बिना उनका निर्माण ध्वस्त कर दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रशासन द्वारा उनको सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे वह अपने आश्रय से वंचित हो गया है। निर्माण ध्वस्त होने से याचिकाकर्ताओं को वित्तीय और भावनात्मक नुकसान हुआ है और याचिकाकर्ता का शांतिपूर्ण जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया देते हुए कहा गया कि अवैध ढंग से निर्माण गिराने पर पीड़ित मुआवजे का हकदार होता है।
याची ने बताया कि गत वर्ष हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए नूंह में सांप्रदायिक झड़पों के बाद निर्माण गिराने के अभियान पर रोक लगा दी थी। तब नूंह के उपायुक्त द्वारा दायर जवाब में कहा गया था कि कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना क्षेत्र में कोई भी विध्वंस गतिविधि नहीं की गई।