भगवंत मान ने सनेटा में शनिवार को आयोजित जनसभा में कहा कि पार्टी पंजाब के 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
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आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के उपप्रधान राहुल गांधी पर नशे के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
आप के सांसद और चुनाव प्रचार समिति के चेयरमैन भगवंत मान ने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी नशे के मुद्दों पर पंजाब में प्रदर्शन करने का ढोंग करते हैं और दूसरी ओर नशा तस्करी के आरोपों में घिरे कांग्रेसी नेताओं के संबंध में चुप्पी साधे हुए हैं। मान ने राहुल गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब में नशे की समस्या के लिए बराबर का जिम्मेदार बताया।
भगवंत मान ने कहा कि साल 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व चुनाव कमिश्नर डॉ. एसवाई कुरैशी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिख कर पंजाब में नशे की समस्या की जानकारी दी थी, लेकिन पीएम ने चुप्पी क्यों साधे रखी? राहुल बताएं कि ड्रग तस्करी मामले में घिरे बिक्रम मजीठिया की सीबीआई जांच संबंधी उठी मांग का कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विरोध क्यों किया।
मान ने कहा कि यह बहुत अजीब बात है कि डॉ. कुरैशी ने समकालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दो पन्नों की चिट्ठी लिख कर पंजाब में दिनों दिन बढ़ रहे नशे के प्रकोप और विधानसभा चुनाव दौरान भारी मात्रा में पकड़े गए नशे संबंधी सभी तथ्य रखने के बाद भी प्रधानमंत्री ने मौन रखा। कुरैशी ने अपनी चिट्ठी में लिखा था कि पंजाब में हर तरह का नशा उपलब्ध और इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन मनमोहन सिंह ने इस पत्र की अनदेखी की।
13 जून को जालंधर में नशे के खिलाफ प्रदर्शन करने आ रहे राहुल बताएं कि अरबों रुपये के नशे के व्यापार में ईडी की तरफ से तलब किए गए जालंधर से कांग्रेस के एमपी संतोख चौधरी पर पार्टी की तरफ से क्या कार्रवाई की गई।
ईडी की तरफ से नशे के मामले में घिरे अकाली नेता चुन्नी लाल गाबा के साथ संबंधों के कारण चौधरी से करीब साढ़े 5 घंटे पूछताछ की गई थी। राहुल गांधी यह भी बताएं कि 2013 में कैप्टन अमरिंदर द्वारा तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ नशा तस्करों और आतंकवादी के साथ संबंध होने के बारे में राहुल को लिखे पत्र पर कार्यवाही क्यों नहीं की। बाजवा के खिलाफ अपनी ही पार्टी के नेता द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद भी उन्हें राज्यसभा में भेजना समझ से बाहर है।