पंजाब के जेल और सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अकाली नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह किसी भी निष्पक्ष जांच एजेंसी या सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के मौजूदा जज से जांच के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी चुनौती दी कि सुखबीर सिंह बादल भी अकाली राज के समय पर घटी बेअदबी की घटनाओं, बिक्रम मजीठिया की चिट्टे की तस्करी में शामूलियत और गैंगस्टरों को पनाह देने के आरोपों की जांच कराने के लिए तैयार रहें।
जेल मंत्री ने कहा कि बिक्रम मजीठिया की बयानबाजी पर ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ की कहावत सही बैठती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय अमन कानून की खराब हालत और जेलों के बेकार प्रबंधों का खामियाजा मौजूदा सरकार को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा गैंगस्टर कल्चर को नकेल डालने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाते हुए कार्रवाई की जा रही है। पिछली सरकार के 10 साल के कार्यकाल में जहां जेलों में हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई वहीं मौजूदा सरकार के कार्यकाल में घटनाओं को रोकने के लिए कई बड़े सुधार किए गए हैं।
अकाली शासन के दौरान जेलों में हुई बड़ी वारदात: रंधावा
उन्होंने कहा कि जब से वह जेल मंत्री बने हैं तब से अब तक राज्य की सभी जेलों में घटी विभिन्न घटनाओं के लिए 10 जेल अधिकारियों /कर्मियों को सेवामुक्त किया है और 50 जनों को निलंबित किया है। जेल मंत्री ने पिछली सरकार के समय में जेलों में घटी बड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि जालंधर की पुरानी केंद्रीय जेल में दो बार 7 जनवरी और 31 जनवरी 2008 को दंगे हुए।
जिला जेल कपूरथला में 23 सितंबर 2011, केंद्रीय जेल फरीदकोट में 22 अप्रैल 2013, जिला जेल होशियारपुर में 10 जून 2013 में दंगे हुए। नाभा की उच्च सुरक्षा जेल में 27 नवंबर, 2016 को जेल तोड़कर बड़े गैंगस्टर फरार हुए हालांकि उसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा गैंगस्टरों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के चलते भागे हुए गैंगस्टरों को काबू किया गया।