पहली बार सिद्धू और कैप्टन नजर आए एक साथ
- फोटो : अमर उजाला
मैं कांग्रेस पार्टी का विकेटकीपर हूं, कैप्टन तो सिद्धू हैं। लंबी में लड़ाई लंबी नही है। सिर्फ चुनाव तक इंतजार करे, फैसला सबको मिल जाएगा। यह कहना है अमृतसर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के पंजाब प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह का। वीरवार को रोड शो कैंसल होने के बाद कैप्टन सिद्धू के साथ संयुक्त पहली प्रेस कांफ्रेस कर रहे थे।
कैप्टन ने कहा कि सिद्धू जब एक फुट के थे तभी से उनके घर उनका आना जाना है। 1979 में सिद्धू के पिता ने उनकी बहुत मदद की थी, तब वे पटियाला कांग्रेस के प्रधान थे। सिद्धू कांग्रेसी थे, डेपुटेशन पर भाजपा में गए।
उन्होंने खंडन किया कि वह बादल को जीत दिलाने के लिए लंबी गए हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि वह बेवकूफ नहीं हैं जो ऐसा फैसला करें। राजनीतिक पारी में यह आखिरी चुनाव है, कोई भी बल्लेबाज आखिरी पारी में सर्वाधिक स्कोर बनाता है, जानबूझकर हिट विकेट नही होता।
'प्रेस कांफ्रेस में मौन रहे गुरु'
पहली बार सिद्धू और कैप्टन नजर आए एक साथ, प्रेस कांफ्रेंस
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प्रेस कांफ्रेस में सिद्धू मौन रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रेस कांफ्रेस में उनके पिता तुल्य (गुरू) बोलेंगे हालांकि एक-दो सवालों का जवाब उन्होंने जुमले में ही दिया। कैप्टन सिद्धू की पहली कांफ्रेंस में कांग्रेस पार्टी को पंजाब व्यापार मंडल ने समर्थन दे दिया है।
पंजाब व्यापार मंडल के प्रधान प्यारा लाल सेठ ने कांग्रेस को समर्थन दिया। उत्तर प्रदेश कल्याण परिषद ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया। उत्तर प्रदेश कल्याण परिषद में अमृतसर में करीब 70 हजार वोट हैं। परिषद के प्रधान डा. जेपी सिंह, सचिव सुग्रीव सिंह और प्रवक्ता रामभवन गोस्वामी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात की। आम आदमी पार्टी (पंजाब) के मीडिया एडवाइजर गुरभेज सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
इस मौके पर अमृतसर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुनील दत्ती, ओमप्रकाश सोनी, इंद्रबीर सिंह बुलारिया और लोकसभा चुनाव लड़ रहे गुरजीत सिंह औजला मौजूद रहे। तरनतारन और आसपास के जिलों के कई बड़े कांग्रेसी नेता भी यहां मौजूद रहे।