कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)
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ब्लैक फंगस बीमारी को महामारी एक्ट के तहत अधिसूचित (नोटीफाई) करने के एक दिन बाद गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि सभी सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इस बीमारी के इलाज के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को यह भी कहा कि ब्लैक फंगस का जल्द पता लगाने और इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर तैनात किए जाएं।
बीमारी के जानलेवा खतरे को टालने के लिए इसका जल्द पता लगाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने डॉ. केके तलवार के नेतृत्व वाली कोविड विशेषज्ञ टीम से कहा कि लेवल-3 स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर यह यकीनी बनाएं कि कोविड मरीजों के इलाज के दौरान अनावश्यक स्टेरॉयड का प्रयोग न हो क्योंकि ब्लैक फंगस बीमारी के मुख्य कारण के तौर पर इसकी पहचान की गई है, खासकर शुगर के मरीजों में।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कोविड समीक्षा की वर्चुअल बैठक के दौरान डॉ. तलवार ने बताया कि कोविड मरीजों के इलाज में स्टेरॉयड का अतिरिक्त प्रयोग बीमारी का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को वैकल्पिक प्रयोग करने के लिए कहा गया है और विशेषज्ञ ग्रुप भी कोशिश कर रहा है कि इलाज का विकल्प और अलग विधि तलाशी जाए। मुख्यमंत्री ने डॉ. तलवार और उनकी टीम से कहा कि वह इस बात का अध्ययन करें कि मरीज कोविड के इलाज के बाद भी अस्पतालों में वापस क्यों आ रहे हैं।
पंजाब में ब्लैक फंगस का कोई केस नहीं
उल्लेखनीय है कि पहले चरण में राज्य में ब्लैक फंगस का कोई केस सामने नहीं आया। हालांकि इस समय के दौरान कई दूसरे राज्यों में केस सामने आए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसे आधार नहीं बनाया जा सकता और स्थिति किसी समय भी बदल सकती है, जिसके लिए पहले ही इसकी रोकथाम के लिए सख़्त एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने कल ही इस बीमारी को महामारी एक्ट के अंतर्गत नोटीफाई किया है।