चंडीगढ़ के मेयर पद के लिए पांच दावेदार हैं। इनमें चार भाजपा और एक कांग्रेस से शामिल है। भाजपा को इस साल खासी मशक्कत करनी होगी। मेयर का चुनाव 18 जनवरी को है। मेयर का कार्यकाल 9 जनवरी को समाप्त हो रहा है। इसके लिए 14 जनवरी को नामांकन होगा, लेकिन चुनाव तिथि बढ़ने से लॉबिंग के लिए समय मिल गया है। दिल्ली तक के नेताओं तक पहुंच बनाने के लिए काफी लंबा वक्त अब मिल गया है। अगला मेयर अनुसूचित जाति से संबंधित होगा। भाजपा में अनुसूचित जाति से संबंधित चार पार्षद सतीश कैंथ, भरत कुमार, राजेश कालिया और फरमिला हैं। वहीं, कांग्रेस की एकमात्र पार्षद शीला देवी हैं। बता दें कि इस बार मेयर पद एससी के लिए आरक्षित है।
यह है समीकरण
नगर निगम में चुने पार्षदों की संख्या 26 है, जिसमें भाजपा के ही 20 पार्षद हैं। इसके अलावा कांग्रेस के चार पार्षद शामिल हैं। वहीं, एक निर्दलीय और एक पार्षद शिरोमणि अकाली दल से है। भाजपा मेयर पद के दावेदारों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। चुनाव की तिथि आगे बढ़ने से संजय टंडन विरोधी खेमे में खुशी है। जानकारों का कहना है कि संसद का सत्र 8 जनवरी को समाप्त हो रहा है, इसलिए 8 जनवरी के बाद भाजपा के केंद्रीय नेताओं और राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात हो सकती है। जीत के लिए 26 पार्षदों की कुल संख्या में से 14 पार्षदों के मत की जरूरत होगी। भाजपा की संख्या 20 है, इसलिए मेयर के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भाजपा का ही होगा, लेकिन चारों दावेदारों में से कौन होगा यह पता अभी चलना मुश्किल है।
साफ-सुथरी छवि को तरजीह
इस साल लोकसभा का आम चुनाव है। भाजपा आम चुनाव से पहले चंडीगढ़ का मेयर चुनाव बेहद संजीदगी से लड़ना चाहेगी। मेयर प्रत्याशी के चुनाव में यह ध्यान रखा जाएगा कि वह साफ-सुथरी छवि का हो। इन चारों दावेदारों में से जो भी खरा उतरेगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा।