मुल्लांपुर स्थित मेडिसिटी में बनने वाले होमी भाभा कैंसर अस्पताल में हो रही देरी की वजह से आखिर पर्दा उठ गया। इसकी मुख्य वजह अस्पताल के लिए वर्ष 2015 में लगाए गए टेंडरों के लिए बढ़िया रिस्पांस नहीं मिलना था। इस कारण विभाग ने दोबारा टेंडर लगाए है। यह खुलासा उस समय हुआ जब सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद में इस संबंध में सवाल किया। इसके बाद केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा भेजे गए जवाब में इसका खुलासा हुआ। वहीं, विभाग ने साफ किया है कि अब टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिस कंपनी को काम सौंपा गया है वह 24 महीनों में अस्पताल की बिल्डिंग तैयार करेगी।
जानकारी के मुताबिक, न्यू चंडीगढ़ स्थित मेडिसिटी में कैंसर अस्पताल बनाया जाना है। गमाडा ने अस्पताल के लिए 50 एकड़ जगह केंद्र सरकार को फ्री दी थी। वहीं, दिसंबर 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका नींव पत्थर रखा था। लेकिन इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया था। इसके बाद से कई तरह के सवाल उठ रहे थे। इसके बाद सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने प्रोजेक्ट के संबंध में प्रश्न उठाया था। इसके बाद संबंधित विभाग की तरफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गवर्निंग बॉडी से जुलाई में मिली अनुमति
विभाग की तरफ से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट को स्टैंडिंग कमेटी ऑफ टीएमसी गवर्निंग काउंसिल से 22 जुलाई 2016 से मंजूरी मिल गई है। प्रोजेक्ट इपीसी बेसिस पर बनाया जा रहा है। जल्द ही इस पर काम होगा।
प्रोजेक्ट के लिए 35 करोड़ दिए
पत्र में बताया गया है कि 31 मार्च 2016 तक परियोजना के लिए 35 करोड़ रुपये दिए गए। इसमें पंजाब के संगरूर जिले में सेटेलाइट कैंसर उपचार सुविधा स्थापना करने के लिए दिए गए हैं। वहीं, इस साल के लिए 50 करोड़ के बजट का प्रावधान रखा गया है।