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कैंसर डे विशेषः डॉक्टर बहू ने ऐसे दी मौत को मात

Wed, 04 Feb 2015 05:30 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मरीज बीमारी से एक बार लेकिन उसके डर से पल-पल मरता है। बीमारी अगर कैंसर जैसी हो तो उसका खौफ ही मरीज को निचोड़कर रख देता है। मगर चंडीगढ़ के जीएमएसएच 16 की डाक्टर बंदना पांडेय ने इस धारणा को पूरी तरह से पलटकर रख दिया। साल 2010 में पता चला कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हैं।
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यह सुनकर उन्हें और उनके पति को थोड़े वक्त के लिए धक्का लगा, लेकिन डा. बंदना ने कैंसर से लड़ने का पूरी तरह से मन बना लिया। उनके पति खुद कैंसर के नामचीन डाक्टर हैं। पहले डा. बंदना ने कैंसर के इलाज को समझा। कीमोथेरेपी के दौरान होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में जाना।

उन्हें मालूम था कि इलाज के दौरान उनके बाल जा सकते हैं। भयंकर दर्द हो सकता है। स्वाद बदल सकता है। उल्टी व दस्त लग सकते हैं। इन सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए वह पहले ही मानसिक रूप से तैयार हो गईं। उन्होंने मन में एक बात बैठा ली कि डाक्टर जो भी कहेंगे, उसे नियमानुसार फॉलो करेंगी।
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कीमोथैरेपी कराने के लिए वे घर से अकेली जाती थीं। चार घंटे डे केयर सेंटर में बिताने के बाद खुद ही कार चलाकर घर वापस आती थीं। जब रेडियोथेरेपी करानी होती थी तो पूरे दिन की छुट्टी नहीं लेती थीं, बल्कि एक घंटे की छुट्टी लेकर वापस काम में जुट जाती थीं।

सर्जरी के पांचवें दिन ज्वाइन किया अस्पताल
कैंसर की सर्जरी के पांचवें दिन ही डा. बंदना पांडेय काम पर वापस लौट आई थीं। उन्होंने जब अस्पताल ज्वाइन किया तो उनके हाथों में टांके और ड्रेन लगी हुई थी।
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बच्चों को पहले ही दिन बता दिया था

अस्पताल के अधिकारी डा. बंदना का यह रूप देखकर चौक जाते थे। उन्होंने बताया कि रेडियोथेरेपी के बाद उनके गले में निशान रहते थे।

अक्सर देखा जाता है कि बीमारी के बारे में बच्चों से छिपा लिया जाता है, लेकिन डा. बंदना ने ऐसा नहीं किया। जब उन्हें कैंसर हुआ था तब उनकी बड़ी बेटी 13 साल और छोटी बेटी नौ साल की थी।

उन्होंने पहले ही दिन अपने बेटियों को बता दिया कि उन्हें कैंसर है। जब रिश्तेदारों को पता चला तो सबके सब आने को तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि 15-15 दिन में घर आएं, ताकि कोई पैनिक न फैले। इससे बच्चों को भी नहीं लगा कि उनकी मां बीमार हैं।

मरीजों को मिलता है हौसला
डा. बंदना पांडेय के पति को जब लगता है कि किसी मरीज का हौसला पस्त है और उसे इलाज के प्रति प्रेरित करना है तो वे अपने पत्नी की कहानी एक बार जरूर बताते हैं। डा. बंदना का अब भी फालोअप चल रहा है, लेकिन वे अब बिल्कुल फिट हैं।

उनका यही कहना है कि कभी भी कैंसर को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। कैंसर पर ध्यान न जाए, इसके लिए उन्होंने अपने को व्यस्त रखा। घर पर बच्चों के साथ तो दफ्तर में अपने पेशे में व्यस्त रहीं।
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