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मशरूम खाने का ये फायदा चौंका देगा आपको

Wed, 29 Oct 2014 03:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अब रूटीन में मशरूम के सेवन से कैंसर और एचआईवी जैसी बीमारियों को कम करने में मदद मिलेगी। यह मानना है शिमला स्थित हिमाचल यूनिवर्सिटी में बॉटनी विभाग के प्रोफेसर और जाने माने साइंटिस्ट प्रो.टीएन लखनपाल का। पिछले करीब 35 सालों से प्रो.लखनपाल मशरूम पर शोध कर रहे हैं।
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मंगलवार को पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) स्थित बॉटनी विभाग में प्लांट साइंस थीम पर आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में पहुंचे लखनपाल ने मशरूम से कैंसर और एचआईवी के इलाज को लेकर विशेष जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के दौर में मेडिशनल मशरूम पर काफी तेजी से काम किया जा रहा है।

मशरूम में प्रोटीन की काफी मात्रा

लखनपाल ने बताया कि मशरूम में 30 से 35 फीसदी प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है, जिससे कैंसर और एचआईवी जैसी बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता है। साथ ही डायबिटीज और जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए भी मशरूम रामबाण साबित होगा।

मशरूम के शुगर फ्री होने के कारण आज दुनिया भर में मेडिशनल मशरूम की मार्केट 10 बिलियन डालर को पार कर चुकी है। उन्होंने बताया कि मशरूम से बने प्रोडक्ट्स का कई स्तर पर ह्यूमन ट्रायल काफी सफल रहा है।

लखनपाल ने कहा कि लोगों को प्रतिदिन भोजन में 5 से 10 ग्राम मशरूम लेकर कैंसर और एचआईवी की संभावना को काफी कम किया जा सकता है।
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घास कीड़ा शक्ति का नया टॉनिक

1995 में चीन के खिलाड़ियों ने इंटरनेशनल स्तर पर सबसे अधिक मेडल जीतकर धूम मचा दी। चीनी खिलाड़ियों पर नशीली दवाओं के सेवन और डोप टेस्ट के आरोप लगे। प्रो.लखनपाल ने बताया कि चीनी खिलाड़ियों की बेहतर परफारमेंस का राज घास कीड़े (कोरडीसेप्स) का सेवन ही था।

इस खास कीड़े में बीमारियों से लड़ने और शक्ति देने की जबर्दस्त क्षमता है। कभी 100 रुपये किलो मिलने वाले इस कीड़े की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 30 लाख प्रतिकिलो पहुंच चुकी है। यह एक किस्म का फफूंद है, जोकि ऊंची पहाड़ियों में पेड़ों की जड़ों में प्राकृतिक तौर पर पाया जाता है।

पंतनगर और सोलन स्थित डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च सेंटर में भी काफी बड़े स्तर पर शोध चल रहा है। खिलाड़ियों और फौजियों के लिए घास कीड़ा काफी फायदेमंद है।
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