फीस वृद्धि के फैसले का कारण जहां पीयू प्रशासन अपनी आर्थिक मजबूरियां बता रहा है, वहीं इसी को लेकर पीयू ने यूजीसी से अतिरिक्त ग्रांट की भी मांग की थी। ताकि पीयू के आर्थिक ढांचे को थोड़ी मजबूती दी जा सके।
लेकिन यूजीसी ने पीयू के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी लगा दी है। इस दौरान यूजीसी ने पीयू को अतिरिक्त ग्रांट जारी करने में खुद को अक्षम बताया है। इसी को लेकर फीस वृद्धि मसले पर मंथन के लिए पीयू द्वारा गठित की गई स्पेशल कमेटी की बैठक भी रद्द हो गई है। बैठक 12 अप्रैल को पीयू परिसर में होनी थी।
उल्लेखनीय है कि इस बार पीयू सीनेट ने विभिन्न कोर्सों में भारी फीस वृद्धि प्रस्तावित की है। जिसे लेकर अलग-अलग छात्र संगठनों ने वीसी को ज्ञापन दिया और तुरंत प्रभाव से प्रस्तावित फीस वृद्धि के प्रस्ताव को रद करने की मांग की। लेकिन इस दौरान पीयू प्रशासन ने फीस वृद्धि के अपने फैसले केपीछे अपनी आर्थिक मजबूरियां जाहिर की। पीयू ने बताया कि उन्हे पिछले कुछ समय से स्टेट की ग्रांट नहीं मिल पा रही है, जिस वजह से पीयू का आर्थिक ढांचा गड़बड़ाया हुआ है, लिहाजा फीस में वृद्धि करना उनकी मजबूरी है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची यूजीसी, फीस वृद्धि मंथन पर गठित कमेटी की बैठक रद
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़।
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जिसके चलते छात्रों ने फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया और 3 अप्रैल से आंदोलन शुरू हो गया। उधर, छात्रों के पिछले नौ दिनों से चल रहे आंदोलन को देखते हुए पीयू प्रशासन ने फीस वृद्धि पर मंथन के लिए एक स्पेशल कमेटी का भी गठन किया। जिसमें पीयू अफसर, प्रोफेसर, सांसद, पूर्व सांसद समेत छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल किए गए। इस विशेष कमेटी की बैठक 12 अप्रैल को होनी तय की गई थी।
लेकिन अब चूंकि यूजीसी ने पीयू को अतिरिक्त ग्रांट देने से इंकार कर दिया है, तो विशेष कमेटी की बैठक भी रद कर दी गई है। मंथन कमेटी के सदस्य एवं पूर्व सांसद पवन बंसल ने कहा कि यूजीसी ने पीयू को न केवल अतिरिक्त ग्रांट देने में असमर्थता जताई है, बल्कि वे इस मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चली गई है और सुप्रीम कोर्ट ने भी पीयू प्रशासन से जवाब मांग लिया है। उनके अनुसार इसी को देखते पीयू प्रशासन ने सभी कमेटी मेंबरर्स को 12 अप्रैल की बैठक रद होने की सूचना दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि पीयू के आर्थिक हालत काफी खराब है, इसलिए पीयू को अतिरिक्त ग्रांट की बेहद जरूरत है। दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरुण ग्रोवर का कहना है कि यूजीसी अतिरिक्त ग्रांट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चली गई है, इसलिए पीयू को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए फीस वृद्धि के मंथन के लिए गठित कमेटी की बैठक को रद किया गया है।