पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के आर्थिक हालात फिलहाल ठीक होते नजर नहीं आ रहे हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) की एक चिट्ठी ने यूनिवर्सिटी को तगड़ा झटका दिया है। पीयू के बजट को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से मांगे जानकारी के जवाब में यूजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को उसके हिस्से का 176 करोड़ का ही बजट दिया जाएगा।
यूजीसी के अनुसार, पीयू को 2016-17 बजट के 132 करोड़ पहले ही जारी हो चुके हैं। यूजीसी के इस कठोर फैसले के बाद पीयू के लिए आने वाले दिनों में दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। यूनिवर्सिटी के पास फिलहाल जनवरी 2017 में भी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में पीयू प्रशासन की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उधर, पीयू प्रशासन के उच्च अधिकारी मामले को लेकर यूजीसी से संपर्क बना रहे हैं। पीयू प्रशासन ने सीनेट के कुछ वरिष्ठ सीनेटर से भी इस मामले में दखल देने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, पंजाब यूनिवर्सिटी कुलपति की ओर से सीनेट में जनवरी 2017 में आर्थिक तंगी से पीयू के बंद होने का बयान दिया था। मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूजीसी और पंजाब सरकार से जवाब तलब किया था। मामले में यूजीसी की ओर से कोर्ट को दिए गए जवाब में कहा गया है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को निर्धारित बजट का 176 करोड़ ही 2016-17 में जारी किया जाएगा।
2016-17 में 176 करोड़ का ही बजट मिल पाएगा यूनिवर्सिटी को
Panjab University
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यूजीसी की इस चिट्ठी से पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए मुश्किलें पैदा हो गई हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन को उम्मीद थी कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एमएचआरडी और यूजीसी पंजाब यूनिवर्सिटी को जरूरत के हिसाब से बजट जारी कर देगा। लेकिन नवंबर में यूजीसी की ओर से तैयार चिट्ठी में निर्धारित बजट से अधिक नहीं देने का फैसला लिया गया है।
277 करोड़ मांगे थे पीयू ने
पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्र और पंजाब सरकार की तरफ से जरूरी ग्रांट नहीं मिल पा रही है। राज्य सरकार तीन साल से करीब 20 करोड़ रुपये जारी नहीं कर रही है। पीयू प्रशासन ने यूजीसी को 277 करोड़ रिवाइज्ड बजट का प्रस्ताव भेजा था। जिसमें 232 करोड़ मौजूदा सत्र, 16 करोड़ 2014-15 और 28 करोड़ 2015-16 सत्र का मांगा गया था, लेकिन पीयू को रिवाइज्ड बजट नहीं दिया गया।
यूजीसी ने नियुक्ति पर उठा सवाल
पीयू की आर्थिक तंगी को देखते हुए यूजीसी ने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को फिलहाल प्रशासनिक और टीचिंग सहित सभी पदों पर भर्ती प्रक्रिया बंद करने को कहा है। इस मामले में बोर्ड ऑफ फाइनेंस में भी मुद्दा उठ चुका है। सूत्रों के अनुसार, बजट की कमी को लेकर यूजीसी की ओर से पीयू प्रशासन द्वारा प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को नियमों की अनदेखी कर वेतन और अन्य भत्ते देने की बात भी कही गई है। यूजीसी ने नियुक्तियों पर ऑडिट ऑब्जेक्शन भी लगाया हुआ है।