यूआईईटी व पीयूएसएसजी रीजनल सेंटर होशियारपुर में बैचरल ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स में क्लोजिंग रैंक 8,56,231 गई है। वहीं यूआईईटी बीई बायोटेक्नोलॉजी कोर्स में रैंक 10,15,280 गई है। इस रैंक का मतलब समझा जाता है कि विद्यार्थियों को निगेटिव अंक मिले हैं जो शून्य से भी नीचे होते हैं।
पीयू के यूआईसीईटी में बीई केमिकल इंजीनियरिंग की मेरिट एसटी वर्ग की 8,09,295 गई है। इस संस्थान में एसटी वर्ग की मेरिट फूड टेक्नोलॉजी कोर्स में 9,17,648 गई है। सीसीईटी में बीई सिविल इंजीनियरिंग की क्लोजिंग रैंक 8,98,096 रही। इसी तरह मैकेनिकल इंजीनियरिंग की क्लोजिंग रैंक 9,11,947 रही।
चंडीगढ़ शहर के इंजीनियरिंग संस्थानों में क्लोजिंग रैंक 10 लाख के पार चली गई। यह आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं। इसका कारण यही है कि संस्थानों की साख प्रभावित हुई है। साथ ही कोरोना के कारण दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी यहां तक कम पहुंचे हैं। इन कोर्सेज में मेरिट कम पहुंचने का कारण प्लेसमेंट की कमी भी हो सकती है। - कुणाल सिंह, शिक्षाविद।
चंडीगढ़ के पांच इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों की 1400 सीटों के लिए आवेदन छह हजार से अधिक पहुंचे हैं। रैंक इस बार जरूर कुछ गिरी है लेकिन इसका एक कारण ये है कि इंटर में 60 फीसदी अंक अनिवार्य होने का मानक नहीं था। सीधे जेईई मेन्स की मेरिट में दाखिले किए गए थे। इसके अलावा देश के कुछ शिक्षण संस्थानों ने पहले दाखिले कर लिए थे। चंडीगढ़ में चार की जगह छह राउंड तक काउंसिलिंग की गई थी ताकि खाली सीटें न रहें। रैंक कम होने का यह भी एक कारण है। मुझे नहीं लगता कि शिक्षण संस्थानों की साख प्रभावित हुई है। - डॉ. एमएस गुजराल, चेयरमैन, इंजीनियरिंग एडमिशन कमेटी।