‘मैम मेरे मां-पापा मुझे एग्जाम को लेकर परेशान कर रहे हैं। हर दूसरे दिन मुझे बोला जाता है, तुझे आईआईटी छोड़ आईटीआई में भी एडमिशन नहीं मिलेगा। मुझे हर समय चिंता रहती है, कहीं मैं सच में पीछे न रह जाऊं।’ जीएमएचएस-22सी की काउंसलर सुनीता कपूर को एकल महीने पहले कॉल कर एक बच्चे ने अपनी परेशानी बताई।
सुनीता ने बताया कि एग्जाम के समय में सबसे ज्यादा प्रेशर बच्चों पर उनके परिजनों का होता हैं। उनके माता-पिता हर समय अपने बच्चों की तुलना टॉपर्स से करते रहते हैं। ऐसे में हम पहले परिजनों की काउंसलिंग करते हैं, उसके बाद बच्चे से बात करते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से नियुक्त काउंसलर सुनीता कपूर ने बताया कि उन्हें हर रोज 10-12 कॉल्स आ रही हैं।
ज्यादातर बच्चे बोर्ड की परीक्षा से कम बल्कि उसके बाद 11वीं में कौन सा विषय लें, आईआईटी के लिए कोचिंग कहां से लें, गणित और विज्ञान में अच्छा स्कोर कैसे करें जैसे प्रश्न पूछ रहे हैं। परिजन बच्चों का दसवीं से ही आईआईटी और पीएमटी का टारगेट फिक्स कर देते हैं। ऐसी परिस्थिति में बच्चा बोर्ड एग्जाम पर फोकस नहीं कर पाता।
इन केसों में हम पहले परिजनों से बात करके उनकी काउंसलिंग करते हैं। उसके बाद बच्चे से बात करकेउसकी समस्या के अनुसार उसका शेड्यूल बनाकर दे रहे हैं।