फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, पंजाब यूनिवर्सिटी में धड़ल्ले से हो रहा प्रयोग, कौन जिम्मेदार

Mon, 07 Oct 2019 12:51 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
सिंगल यूज प्लास्टिक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
चंडीगढ़ समेत पूरे देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लग गया है, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी में धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। बॉटनी विभाग में हुई फ्रेशर पार्टी में बड़ी संख्या में पैक प्लास्टिक पानी गिलास प्रयोग किए गए। यही नहीं उन गिलासों को खुले में फेंक दिया गया। एक तो प्लास्टिक प्रतिबंध के बाद प्रयोग किया गया और दूसरा स्वच्छता अभियान के नियमों का उल्लंघन किया। लोगों का कहना है कि जहां विद्यार्थियों को नियम कायदों की शिक्षा दी जाती है वही पीयू नियमों को तार-तार कर रहा है।
विज्ञापन


27 सितंबर को पंजाब गवर्नर एवं प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने चंडीगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने की घोषणा की थी। उसके बाद दो अक्तूबर को पीएम नरेंद्र मोदी भी इसकी घोषणा कर चुके हैं। सबसे अधिक असर वहां इसका दिखना चाहिए था जहां पर पढ़े लिखे लोगों की बहुतायत है, लेकिन वहीं पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। बॉटनी विभाग में दो दिन पहले फ्रेशर पार्टी हुई थी। इस पार्टी में पानी प्लास्टिक के बंद गिलास में लाया गया और विद्यार्थियों व इस पार्टी में शामिल शिक्षकों ने प्रयोग किए।

यही नहीं उसके बाद विभाग के गार्डन में इन गिलासों को फेंक दिया। कुछ पीछे कूड़े के ढेर में खुले में फेंके गए हैं। अभी तक यहां सफाई नहीं की गई। बताया जाता है कि अन्य विभागों में भी ऐसे केस देखने को मिल रहे हैं। पीयू राज्यपाल व पीएम की ओर से की गई घोषणा की धज्जियां उड़ा रहा है। नियम हैं कि सिंगल यूज प्लास्टिक जहां पर प्रयोग होता है उस संस्थान या विभाग पर पांच हजार से लेकर पांच लाख तक का जुर्माना पड़ता है। अब देखना है कि पीयू के जिम्मेदार अधिकारी इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं।
विज्ञापन


सीनेट में नियमों का पालन
27 सितंबर को जब सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लग गया तो 28 सितंबर को सीनेट की बैठक में इसका असर देखने को मिला। वहां पर किसी भी सदस्य को प्लास्टिक की बोतल में पानी नहीं दिया गया। कांच के गिलास में पानी पिलाया गया था। इसी तरह अन्य विभाग भी पालन करते तो शिक्षण संस्थान से एक अच्छा संदेश जाता।

विकल्प नहीं होने से किया यूज
हमने खाना व पानी किसी कैंटीन संचालक से मंगवाया था, उनके पास पानी के लिए विकल्प नहीं था, इसलिए वह यह गिलास ले आए थे। विकल्प जब सामने आएंगे तो धीरे धीरे यह प्लास्टिक गिलास बंद होंगे। मैं कल बाहर गई हुई थी, परिसर में फेंके गिलास आदि को सोमवार को उठवाया जाएगा।
विज्ञापन

- प्रो. डेजी रानी बतीश, चेयरपर्सन, बॉटनी विभाग

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें