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पंजाब यूनिवर्सिटी के डेंटल शिक्षकों को मानने पहुंचा प्रो टीचर्स ग्रुप, कहा- आपके बगैर पुटा अधूरा

Sat, 17 Aug 2019 12:06 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस - फोटो : file photo
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पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, पीयू में प्रचार भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रत्याशी अपने वोटरों को लुभाने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं। इसी कड़ी में प्रो टीचर्स ग्रुप की अध्यक्ष पद की दावेदार डॉ. जयंती दत्ता शुक्रवार को पुटा से अलग हुए डेंटल इंस्टीट्यूट के टीचर्स को मनाने के लिए पूरी टीम के साथ डेंटल कॉलेज पहुंचीं। उन्होंने डेंटल शिक्षकों की समस्याएं सुनीं और उनकी हर समस्या को हल करने का आश्वासन दिया। साथ ही शिक्षकों से पुटा में शामिल होने का आह्वान किया।
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डॉ. दत्ता ने इस दौरान कहा, ‘उन्हें चुनाव जीतने से ज्यादा फिक्र पुटा से अलग हुए डेंटल कॉलेज के 50 टीचरों की है। इन टीचरों के  अलग होने से पुटा को बड़ा नुकसान हुआ। शिक्षकों की एकता भी कम हुई है।’ ऐसा पहली बार हुआ है कि पुटा चुनावों में डेंटल इंस्टीट्यूट के टीचर्स हिस्सा नहीं ले रहे हैं। इससे पुटा की ताकत कम हुई है, इसको देखते हुए ‘वी मिस डेंटल फैकल्टी इन पुटा 2019-20’ के पोस्टर-बैनर लेकर डॉ. जयंती दत्ता व उनकी टीम डेंचल कॉलेज पहुंची और मनाने की कोशिश की।

उन्होंने डेंटल के टीचर्स को आश्वासन दिलाया कि चुनाव जीतने के बाद वह डेंटल फैकल्टी की सालों से लंबित पड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाएंगे। मालूम हो कि अमर उजाला ने डेंटल शिक्षकों की प्रोमोशन पालिसी का मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद तमाम शिक्षकों ने इस मामले को गंभीरता से माना और इसे राजनीति से नहीं जोड़ने को कहा गया।
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इसलिए अलग हुए डेंटल इंस्टीट्यूट के टीचर्स

लगभग पांच साल से यूनिवर्सिटी की प्रमोशन पॉलिसी लटक रही है जिससे खफा डेंटल इंस्टीट्यूट के टीचर्स ने इस बार पुटा इलेक्शन में भाग न लेने का निर्णय किया। इस बारे पीयू प्रशासन को सभी टीचर्स ने साइन कर एक लेटर लिखा है। इंस्टीट्यूट में लगभग 90 फैकल्टी मेंबर्स है जिसमें 46 ही परमानेंट हैं। डेंटल इंस्टीट्यूट को 2006 में शुरू किया गया था। इसमें 18 डिपार्टमेंट हैं, जिसमें से 9 डेंटल और 9 मेडिकल के हैं।

8 क्लीनिकल, 11 प्री क्लीनिकल और पैरा मेडिकल लैबोरेट्रीज हैं। इसमें हर साल लगभग सौ बीडीएस स्टूडेंट्स के एडमिशन होते हैं और अब इंस्टीट्यूट ने पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स भी शुरू कर दिए हैं। लेकिन इतने समय में भी किसी टीचर की प्रमोशन नहीं हुई है। 2014 में इसके लिए पहली बार प्रमोशन पॉलिसी बनी थी। इसके बाद से इसे लेकर कई कमेटियां बनीं और कई पॉलिसीज ड्राफ्ट की गईं लेकिन लागू एक भी नहीं हुई।

 
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