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पीयू में गर्माने लगा है राजनीतिक माहौल, शुरू हुआ बैठकों का दौर, डीन के पास एक खास अधिकार

Tue, 30 Oct 2018 10:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब विश्वविद्यालय में अभी से राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। इसका कारण यह है कि दिसंबर में सिंडिकेट के चुनाव होने वाले हैं। इसके कुछ समय बाद डिपार्टमेंट के डीन व सेक्रेटरी के चुनाव होंगे। चुनाव में भाग्य आजमाने वाले अभी से रातोंरात बैठकें कर सीनेटर व सिंडिकेटर्स को अपने पाले में लाने में लगे हुए हैं। रविवार को इस चुनाव के लिए खड़े हुए एक गुट ने पीयू में गोपनीय बैठक भी की। इस समय पीयू में 68 डीन और 68 सचिव हैं। हर विभाग का अपना एक डीन होता है। साथ ही एक सचिव चुना जाता है। इस चुनाव के वोटर सीनेट व सिंडिकेट के सदस्य होते हैं। इनकी संख्या 106 है।
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सूत्रों की मानें तो डीन व सचिव बनने की इच्छा रखने वाले शिक्षकों ने अभी से इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। अभी से ही बैठकों का दौर जारी हो चुका है। इस चुनाव में खड़े होने वाले एक गुट ने शुक्रवार को गोपनीय बैठक की। वहीं रविवार को दूसरे गुट ने बैठक कर निर्णय लिए। सीनेट व सिंडिकेट में शिक्षकों की भारी तादाद है। इसके कारण शिक्षकों का जोड़-तोड़ तेजी से चल रहा है। नामित सदस्यों को भी अपने पाले में लाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। उन्हें अपनी तरफ कैसे खींचा जाए इसके लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि डीन व सचिव चुनाव के लिए तीन गुट काम कर रहे हैं जो अपने-अपने लोगों को इस कुर्सी पर विराजमान देखना चाहते हैं। मालूम हो कि सिंडिकेट के चुनाव में सीनेट के सदस्य वोट करेंगे। उनकी संख्या 91 है। इसमें लगभग 40 शिक्षक हैं। यहां एक बात स्पष्ट है सिंडिकेट के चुनाव में जिसका दबदबा कायम होगा, उसी के डीन व सचिव चुने जाएंगे। इसी मेन कड़ी पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए ये गुट अभी से सक्रिय हो गए हैं।  
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ये अधिकार हैं डीन के पास...
पीयू में 68 विभाग हैं। हर साल इन विभागों में कई पदों पर तैनाती होती है। इस तैनाती में विभाग अध्यक्ष के अलावा डीन की उपस्थिति जरूरी होती है ताकि और पारदर्शिता बनी रहे। इस तरह डीन का रोल तैनाती में होता है। रिसर्च पेपर प्रकाशित कराने, प्रशासनिक कार्य, विभागीय निर्णय लेने आदि के कार्य भी इन्हीं के हैं।

अपने पसंद के चार फैकल्टी चुन सकते हैं सीनेटर
सीनेटर चार फैकल्टी में अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं। उन्हें यह अधिकार दिया गया है। साथ ही विभाग के प्रोफेसर आदि इसमें वोट करते हैं और अधिक मत पाने वाला उम्मीदवार विजयी हो जाता है। कंबाइंड फैकल्टी में भी यही व्यवस्था होती है। जैसे कॉमर्स व बिजनेस मैनेजमेंट के लिए, लेकिन वहां सीनेटर के दांव पूरी तरह सफल नहीं हो पाते हैं। कारण, वहां शिक्षक अलग-अलग मत के हैं।
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