कहने को तो देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी है पंजाब यूनिवर्सिटी, लेकिन हालात ऐसे हैं कि नई भर्ती तक नहीं कर सकती। पंजाब यूनिवर्सिटी में फिलहाल नए प्रोफेसरों की नियुक्ति रोक दी है।
आर्थिक स्थिति तंग होने के कारण भर्ती में एक से 2 साल का समय लग सकता है। पर्याप्त बजट होने के बाद ही भर्ती पर लगी रोक हटेगी। पीयू के कई विभागों में शिक्षकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पीयू री-इंपलाइमेंट, कांट्रैक्ट और गेस्ट टीचर्स के सहारे कई विभागों को चला रहा है।
जानकारी के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से हाल ही में शिक्षकों की कमी को लेकर ऑडिट कराया है। मामले की रिपोर्ट कमेटी ने वीसी को भी सौंपी है। रिपोर्ट में पीयू में तुरंत 175 से 200 नए शिक्षकों की नियुक्ति का प्रपोजल दिया है। रिपोर्ट में कई पुराने विभागों में शिक्षकों की स्थिति पर चिंता जताई गई है।
ठेके पर कर्मचारियों की भर्ती भी संभव नहीं
पंजाब यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि बोर्ड ऑफ फाइनेंस मीटिंग में नई भर्ती पर रोक लगाने को कहा गया है। टीचिंग ही नहीं पीयू के नॉन टीचिंग पदों पर भी फिलहाल रोक लग गई है। पीयू की आर्थिक हालात ऐसे हैं कि ठेके पर भी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है।
उधर, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक पीयू को इसके हिस्से का पूरा बजट जारी नहीं किया गया है। यूजीसी ने 175 करोड़ ग्रांट में इजाफे को भी मना कर दिया है।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से स्टे लेकर फिलहाल 45 प्रोफेसर कार्यरत हैं। मामले में कभी भी अंतिम फैसला आने पर ये पद भी खाली हो जाएंगे। पीयू के विभागों में टीचिंग स्टॉफ की कमी को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) जल्द ही मामले को यूजीसी और केंद्र सरकार के सामने उठाएगी।
टीचिंग स्टेंडर्ड पर बुरा असर पड़ने का डर
दाखिला
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पूटा पूर्व प्रेसिडेंट और ईवनिंग विभाग में प्रो. मोहम्मद खालिद का कहना है कि पीयू में शिक्षकों की भरती पर रोक लगाने का यूजीसी को कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर प्रहार है।
उन्होंने कहा कि देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी के कई विभागों में 2 से 3 प्रोफेसर काम कर रहे हैं, जबकि कोर्स की संख्या बढ़ चुकी है। पूटा के ही पूर्व प्रेसिडेंट और अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर डॉ.अक्षय कुमार का कहना है कि पीयू में 175 से 200 प्रोफेसर की सख्त जरुरत है।
उन्होंने कहा कि 40 फीसदी पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से टीचिंग स्टेंडर्ड पर काफी बुरा असर पड़ेगा। देश की टॉप यूनिवर्सिटी के ऐसे हालात चिंता का विषय है।
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काउंसिल के सेक्रेटरी आशिक मोहम्मद का कहना है कि स्टूडेंट काउंसिल जल्द ही नए शिक्षकों की भरती को लेकर मामले को वीसी के सामने उठाएगी। उन्होंने कहा कि विभागों में टीचर्स और स्टूडेंट रेशो का पालन नहीं किया जा रहा।