‘किस-किस को जाये समझाएं, यहां भी अक्ल के दुश्मन हैं, वहां भी दीवाने हैं।’ ये शब्द पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने सेमिनार के दौरान कहे। मनप्रीत सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में ‘पाक की धार्मिक कूटनीति: मृगतृष्णा और वास्तविकता’ पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को समझने के लिए उसकी भाषा को समझना बहुत जरूरी है।
मनप्रीत ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पाकिस्तानी भाषा के कोर्सेज पंजाबी (शाहमुखी स्क्रिप्ट), बलौच, सिंधी इत्यादि शुरू करवाए। भाषाई कोर्सेज के लिए पंजाब सरकार फंड मुहैया कराएगी। सेमिनार के दौरान मनप्रीत ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान हुए नरसंहार ने दोनों देशों में नफरत के बीज बोए।
अगर दोनों देश इस मुद्दे को हल भी करें फिर भी दुश्मनी बनी रहेगी। इसके साथ उन्होंने संस्थान की ओर से करतारपुर कॉरिडोर के मुद्दे पर चर्चा को अच्छा संकेत बताया। कॉरिडोर पर उन्होंने कहा कि पूरी जांच-पड़ताल के बाद पाक पर भरोसा कर सकते हैं। पीयू के वाइस चांसलर प्रो. राज कुमार ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से ही अप्रत्याशित देश रहा है।
उन्होंने साइंटिस्ट और ह्यूमैनेटिज के विद्यार्थियों के लिए भी नेशनल सिक्योरिटी विषय पढ़ने की उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने यूजीसी की ओर से विभाग को दिए गए 2 करोड़ ग्रांट के बारे में कहा कि इससे विभाग की शिक्षण व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के स्टेट इंफॉर्मेशन कमिश्नर ले. जनरल केजे सिंह और डिफेंस एंड नेशनल सिक्योरिटी विभाग के चेयरमैन डॉ. जसकरन सिंह ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
राष्ट्रीय संस्थानों को बचाकर रखना होगा
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह ने कहा कि देश को बचाने के लिए हमें राष्ट्रीय संस्थान जैसे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, रिजर्व बैंक इत्यादि को बचाकर रखना होगा। हर नागरिक को कानून का सम्मान करना चाहिए। अगर हमारे राष्ट्रीय संस्थान ढह गए तो हमारी भी हालत पाकिस्तान जैसी हो जाएगी।