बीकॉम कॉस्ट अकाउंटिंग के पेपर लीक मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी भी कम दोषी नहीं है। वह इसलिए क्योंकि जब शिक्षक ने इस विषय का पेपर दिसंबर से पहले वाले एग्जाम के लिए बनाकर दिया था तो फिर इसका इस्तेमाल पीयू ने दिसंबर के सेमेस्टर एग्जाम में क्यों किया? इसका जवाब न तो शिक्षक को मिल रहा है और न अन्य लोगों को। इससे पीयू प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जब एसडी कॉलेज में मिड सेमेस्टर में यह पेपर आ चुका था तो वहां के विद्यार्थियों के अलावा अन्य छात्रों को भी कई प्रश्नों का पता लगा होगा?
ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता एसडी कॉलेज में ही नहीं अन्य जगह भी प्रभावित हुई है। इतना ही नहीं इसके अलावा पीयू एक नियम में और फंस रहा है। इसमें एक समय पीयू की व्यवस्था थी कि पेपर सैट करने के लिए दूसरी यूनिवर्सिटीज के शिक्षकों को बुलाया जाता था। लेकिन इसी बीच बदलाव कर दिया गया कि अपने ही कॉलेजों के शिक्षकों से पेपर सैट करवाना शुरू कर दिया। यही कारण है कि पेपर रिपीट हुआ। यही नहीं, पीयू से संबद्घ कॉलेज के शिक्षक जब पेपर खुद सैट करेंगे तो इस व्यवस्था पर पूरा यकीन नहीं किया जा सकता।
जानकारों का कहना है कि यह यकीन कैसे करें कि पेपर सैट करने वाला शिक्षक अपने प्रश्नों की जानकारी बाहर कहीं नहीं देगा। इन सभी सवालों को लेकर पीयू कटघरे में है। लोगों के उठाए गए सवालों के जवाब पीयू को ही देने होंगे। इसको लेकर आक्रोश एसडी कॉलेज के स्टूडेंट्स में भी पनप रहा है। वहीं दोबारा एग्जाम में क्यों शामिल हों, उनका कसूर क्या था।
कुछ स्टूडेंट्स का तो यह भी कहना है कि जब एग्जाम की कॉपियां चेक की जाएं और कॉस्ट अकाउंटिंग के पेपर में अधिकांश स्टूडेंट्स के नंबर 85 फीसदी या 90 फीसदी से अधिक आएं तो फिर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया जाए। हालांकि अब बीकॉम फैकल्टी की बैठक 16 दिसंबर को होगी, उसमें कई बड़े फैसले लिए जा सकेंगे, लेकिन पीयू को भी अपनी गलतियों से सीख लेनी होगी।
इस पेपर लीक के मामले को गंभीरता से लिया गया है। यह समस्या कहां से शुरू हुई, इसको दिखवाया जाएगा और ऐसा भविष्य में दोबारा न हो इसके लिए उचित व्यवस्था की जाएगी।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई