पंजाब यूनिवर्सिटी को ग्लोबल बनाने के सपने देख रहे पीयू प्रबंधन के लिए चिंता का विषय है कि एनआरआई स्टूडेंट्स के दाखिले का स्तर लगातार कम हो रहा है। पिछले साल जहां एनआरआई कोटे के तहत 41 दाखिले हुए थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा आधे से भी कम सिर्फ 17 पर सिमट गया है।
कहीं न कहीं दाखिले की प्रक्रिया में बार-बार बदलाव और इंटरनेशनल स्तर पर स्टूडेंट्स को प्रभावित करने के लिए एक्सपर्ट ना होना भी इसका एक मुख्य कारण है। इसके अलावा इस बार एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पीयू में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के विभाग में कुछ ऐसी शिकायतें आई हैं कि नाम के कंफयूजन में पीयू के बजाय दूसरी जगह दाखिला करा बैठे। दरअसल पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से मिलते नाम के कुछ अन्य निजी संस्थान हैं। सूत्रों के मुताबिक पीयू को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि गलती से दूसरी जगह दाखिले का आवेदन हुआ, जो मंजूर भी हो गया।
नियमों में बदलाव मुख्य कारण
एनआरआई कोटे के तहत दाखिले में दो बार नियम बदले गए। पहले कहा गया कि किसी एनआरआई या विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति का वह बच्चा पीयू में दाखिला ले सकता है, जो कम से कम तीन साल से भारत के अलावा किसी अन्य देश में रह रहा हो। लेकिन बाद में फिर नियम बदल दिए गए, जिसमें से तीन साल की दूसरे देश में रहने की शर्त हटा दी गई। वहीं पीएचडी और एमफिल के लिए तो पिछले माह तक भी नियम बदलते रहे। इस तरह बार-बार नियमों का बदलना दाखिले पर असर डाल रहा है।