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छात्रों को झटका, पीयू सीनेट में हंगामे के बीच 10 फीसदी फीस बढ़ोतरी पर मोहर

Mon, 07 May 2018 11:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट - फोटो : अमर उजाला
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छात्रों को बड़ा झटका, पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट की रविवार को हुई बैठक में हंगामे के बाद 10 फीसदी फीस बढ़ोतरी पर मुहर लगा दी गई। सिंडिकेट ने पिछले सप्ताह हुई बैठक में फीस कमेटी के बनाए नए ढांचे को पास कर सीनेट में भेजा था। अब सीनेट ने भी फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास कर दिया है। हालांकि इसको लागू करने से पहले हंगामा भी हुआ। नया फीस ढांचा पीयू कैंपस और छह कांस्टीट्यूट कॉलेजों पर नए सेशन से लागू होगा।
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जबकि पीयू से मान्यता प्राप्त अन्य सरकारी एवं निजी कॉलेजों में पहले ही पांच फीसदी फीस बढ़ोतरी लागू हो गई थी। फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास करने को लेकर सीनेट में दो पक्ष बने, लेकिन अंत में प्रस्ताव पास होकर रहा। सीनेट के कुछ सदस्य चाहते थे कि फीस बढ़ोतरी इस साल न की जाए। इसे अगले साल तक टाल दिया जाए। जबकि पंजाब के विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि इसके विरोध में आ गए। उनका कहना था कि कॉलेजों के मुकाबले पीयू की फीस कम है।

अगर यूनिवर्सिटी को ढंग से चलाना है तो थोड़ी-बहुत फीस बढ़ानी ही चाहिए। सीनेट सदस्य प्रो. जेके गोस्वामी ने कहा कि फीस तब बढ़ानी चाहिए जब स्टूडेंट को सुविधाएं अव्वल दर्जे की मिलें। पीयू कैंपस में ऐसी बहुत लैब हैं, जिनके उपकरण पुराने हो गए हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सीनेट सदस्य पवन बंसल ने कहा कि शिक्षण संस्थान की जरूरत सरकार को पूरी करनी चाहिए। इस तरह थोड़े-थोड़े पैसे बढ़ाकर कोई फायदा नहीं होने वाला।
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कुछ लाख रुपये आय बढ़ जाने का क्या फायदा होगा? इसके अलावा सीनेटर नरेश गौड़ ने भी फीस न बढ़ाने की बात कही और सरकार को सही स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा। हालांकि कुछ सदस्य फीस बढ़ोतरी के हक में थे क्योंकि समय के साथ जरूरतें बढ़ रही हैं।

आय बढ़ोतरी पर यूजीसी को क्या देंगे जवाब
फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर हो रहे हंगामे और सभी पक्षों की सुनकर वीसी ने कहा कि यूजीसी को क्या जवाब देंगे? यूजीसी ने साफ तौर पर निर्देश जारी किए हैं कि संस्थान अपनी आय बढ़ाए। अब आय बढ़ाने के लिए कहां जाएं? फीस नहीं बढ़ी तो आय नहीं बढ़ेगी और फिर यूजीसी को क्या जवाब देंगे?

एबीवीपी ने किया विरोध
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वरिष्ठ छात्र नेता हरमनजोत सिंह गिल ने कहा कि फीस बढ़ोतरी जैसा महत्वपूर्ण मुद्दा सीनेट में चर्चा के लिए था, लेकिन पीयू स्टूडेंट काउंसिल ने अपना पक्ष ही नहीं रखा। यह एनएसयूआई का फेलियर है, क्योंकि इनके नेता काउंसिल चलाते हैं।

स्टूडेंट क्यों बोझ लें: रंधावा
पीयू स्टूडेंट काउंसिल के संयुक्त सचिव करन रंधावा ने कहा कि जब पंजाब ने पीयू का बजट बढ़ा दिया है तो फिर फीस बढ़ाने की क्या जरूरत थी? यूनिवर्सिटी में वित्तीय दिक्कत का बोझ स्टूडेंट पर क्यों आए?
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आधारहीन बढ़ोतरी
पीयू स्टूडेंट काउंसिल की सचिव वाणी सूद के मुताबिक यह फीस बढ़ोतरी आधारहीन है। इसका विरोध किया जाता है और काउंसिल पीयू के छात्रों के साथ है।
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