पंजाब यूनिवर्सिटी इस बार वार्डन की तैनाती वरिष्ठता से नहीं बल्कि साक्षात्कार के आधार पर करेगा। जानकारों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस नीति से मनमानी को बढ़ावा मिलेगा। साथ उन्हीं चेहरों पर मुहर लगेगी जिनको साक्षात्कार कमेटी चाहेगी। पीयू में मांग उठ रही है कि वार्डन की तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ एक और मानक जोड़ा जाना चाहिए। जिस फैकल्टी में छात्रों की संख्या अधिक है वहां के शिक्षकों को वार्डन बनाया जाना चाहिए ताकि हर फैकल्टी का प्रतिनिधित्व हो सके।
पीयू के कैलेंडर में वार्डन तैनाती के नियमों में वरिष्ठता को कोई स्थान नहीं दिया गया है, लेकिन शिक्षकों की मांग को ध्यान में रखकर पिछले वर्षों में इसके तहत वार्डन्स की तैनाती हुई है। सूत्रों का कहना है कि केवल वरिष्ठता के आधार पर ही तैनाती होने से उन विभागों के शिक्षक वार्डन नहीं बन पाए जिनमें छात्रों की संख्या सर्वाधिक थी। वहां से महज एक या दो वार्डन आए जबकि अन्य फैकल्टी से कई वार्डन बने। इसके अलावा कॉरस्पॉन्डन्स के शिक्षकों को भी वार्डन बनाया गया जबकि उनके छात्रों की संख्या हॉस्टलों में शून्य रही है।
अब दो वार्डनों का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें ब्वॉयज हॉस्टल नंबर सात के डॉ. दिनेश कुमार और हॉस्टल नंबर आठ के डॉ. नरेश कुमार शामिल हैं। इनकी जगह तैनाती के लिए पीयू प्रशासन ने आवेदन मांगे हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए एक दर्जन से अधिक शिक्षकों ने आवेदन किए हैं।