पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट की बैठक में कई अहम मामलों पर चर्चा हुई और कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। खासकर पीयू की रिसर्च स्कॉलर के यौन उत्पीड़न मामलें में। मीटिंग में पीड़ित छात्रा की स्कॉलरशिप बहाल करने और उसका दोबारा पंजीकरण करना भी एक प्रमुख मुद्दा रहा। बैठक में फैसला किया गया कि स्कॉलरशिप बहाली और पुन: रजिस्ट्रेशन पर अंतिम निर्णय कुलपति का होगा। वह पूरे मामले की दोबारा जांच कराएंगे।
उनकी अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अलावा बैठक में कंप्यूटर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. टंकेश्वर कुमार के मामले में भी कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया। इसमें उनके डेपुटेशन के लिए एक्सटेंशन की मांग की गई थी। इस पर भी अंतिम निर्णय कुलपति प्रो. राज कुमार ही लेंगे। वहीं, पीयू के कार्यकारी रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह को रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति करने के फैसले को भी सिंडिकेट ने स्वीकार लिया।
क्या है मामला
पीयू की महिला डीएसडब्ल्यू के बेटे पर विवि की ही एक रिसर्च स्कॉलर ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इस मामले में बाद में पीयू वीसी ने रिसर्च स्कॉलर का पंजीकरण रद्द कर दिया था। साथ ही उसकी स्कॉलरशिप पर रोक लगा दी थी। इसके बाद छात्रा कोर्ट चली गई थी और कोर्ट के आदेश पर यूजीसी ने पीयू से मामले में जवाब तलब किया था। इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी पर भी विवाद हो गया था क्योंकि कमेटी में आरोपी युवक के एक रिश्तेदार शामिल था, जिसे बाद में कमेटी से हटा दिया गया। अभी कमेटी ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट नहीं दी है।
सिंडिकेट की बैठक में ये भी..
पीयू वाइस चांसलर ने बैठक में बताया कि डॉ इंदु पाल कौर, प्रोफेसर ऑफ फार्मास्यूटिक्स, यूआईपीएस, पंजाब विश्वविद्यालय को महिला वैज्ञानिक पुरस्कार 2018 अवार्ड से मिलेगा। पूर्व प्रोफेसर और हिंदी विभाग के प्रमुख डॉ धर्म पॉल मेनी को सभी भाषाओं के क्षेत्र में दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार मिला। डॉ जेएस सहरावत, एंथ्रोपोलॉजी विभाग को 30.58 लाख रुपये का अनुदान मिला है। उन्हें यह राशि विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोजेक्ट के लिए मिली है। नए फर्नीचर की खरीद के लिए यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल एलमुनी एसोसिएशन ने 11 लाख रुपये दान किए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 6,63 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर कर दिया है।