पंजाब यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के कोरोना डेटा का विश्लेषण किया है। साथ ही देश को आंकड़ों का मिलान उनसे किया गया तो एक बात साफ निकलकर आई है कि यदि 21 दिन के लॉकडाउन का भारत की जनता शत प्रतिशत पालन करती है तो 50 फीसदी कोरोना पर हम काबू पा लेंगे।
कोरोना का समूल नष्ट करने के लिए इस लॉकडाउन के बाद 21 दिन का लॉकडाउन और जरूरी है। क्योंकि उस समय तक देश पूरी तरह कोविड-19 के तीसरे चरण में आ जाएगा। इस दौरान पूरी जनता को धैर्य बनाकर काम करना होगा।
22 मार्च के लॉक डाउन से मिली भारत को संजीवनी
वैज्ञानिकों ने यह बात भी साफ कर दी कि यूरोप के एक दर्जन से अधिक देश ऐसे हैं जिनमें कोरोना उसी समय फैला जब इंडिया में पहला केस आया। यह स्टेज प्रथम थी। दुनिया के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना उन देशों में पूरी तरह फैल गया और तीसरे से चौथे चरण में आ गया, लेकिन समूचे भारत में कोरोना के तीसरे चरण शुरुआत नहीं हो पाई।
कुछ स्टेट में जरूर तीसरे चरण के संकेत मिले हैं। वैज्ञानिकों के विश्लेषण में एक और बात निकलकर सामने आई है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से 22 मार्च को किए गए लॉकडाउन से काफी लाभ मिला है। यही कारण है कि दूसरे देशों की अपेक्षा इंडिया में स्थिति भयावह नहीं हुई।