कोरोना के कारण हर कोई अपने घरों में है। कोई बाहर नहीं निकल रहा है। सबसे अधिक वह परिवार प्रभावित हुए हैं जिनके पास पैसे नहीं हैं। हर दिन वह काम करते थे और घर चलाते थे। इन्हीं लोगों की मदद के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के शिक्षक व कर्मचारी सामने आए हैं। उन्होंने अपने-अपने घरों से जुड़े रहे लोगों को फोन किया। उन परिवारों ने मदद मांगी। शिक्षक व कर्मचारी अब उन्हें पैसे भी भिजवा रहे हैं और राशन की व्यवस्था भी कर रहे हैं। इस कार्य में लगभग 150 लोग जुटे हैं। इनके सहारे लगभग 500 परिवारों का पालन-पोषण हो रहा है।
शिक्षकों व कर्मचारियों ने कहा है कि अन्य लोग भी अपने से जुड़े रहे लोगों की मदद को आगे आएं। पीयू में शिक्षकों व कर्मचारियों की संख्या पांच हजार से अधिक है। अधिकांश परिवारों में खाना बनाने वाली, बर्तन धोने वाली महिलाएं आती हैं। इनके अलावा कपड़े धोने के लिए भी महिलाएं व पुरुष आते हैं। साथ ही इनके बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए रिक्शा चालक भी आते हैं। जब तक कोरोना नहीं था तब तक इन लोगों ने लगातार घरों में काम जारी रखा, लेकिन जैसे ही लॉक डाउन हुआ तो बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
अब इन परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया। पैसे आएं तो कहां से। राशन भी खत्म हो गया। बिना पैसे कोई राशन देने को भी तैयार नहीं। इनमें से कुछ लोगों ने शिक्षकों व कर्मचारियों से संपर्क किया तो कुछ से शिक्षकों ने खुद संपर्क किया। धीरे-धीरे रास्ते तलाशे गए। आखिर में इन लोगों को खातों में पैसे भेजे गए तो कुछ के घर राशन आदि भिजवाया। इन शिक्षकों व कर्मचारियों का कहना है कि यह भी उनके परिवार का हिस्सा हैं। इस मुसीबत में उनका साथ देना जरूरी है। उनके परिवार के विकास में इन लोगों का भी योगदान है।
पीयू के प्रो. प्रशांत गौतम, सीनेटर प्रो. अजय रंगा, कर्मचारी नेता दीपक कौशिक, प्रो. जेएस सहरावत आदि इस काम में लगे हुए हैं। वह लोगों से संपर्क साध रहे हैं और घर में रहकर मदद कर रहे हैं। दवाएं आदि की भी व्यवस्थाएं यह कर रहे हैं। कई अन्य शिक्षक लोगों की मदद को आगे आ रहे हैं।