Punjab University Professor Arun Kumar Grover
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पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) में चल रहे वित्तीय संकट और स्टाफ की कमी पर वाइस चांसलर प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने मंगलवार को अहम मीटिंग बुलाई है। इसमें सभी चेयरपर्सन, डायरेक्टर्स, टीचिंग डिपार्टमेंट के को-आर्डिनेटर और सभी डीन को शामिल होने के आदेश दिए गए हैं।
मुसीबत में फंसी पीयू को बाहर निकालने की रणनीति बनाई जाएगी। सभी को एजेंडा पहले ही दिया जा चुका है और एजेंडे के हिसाब से अपने सुझाव और तैयारी करके आने के निर्देश दिए गए हैं। इस बैठक में कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। मीटिंग में डिपार्टमेंट्स के एकेडमिक कैलेंडर और एनुअल सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट का परफोर्मा फाइनल किया जाएगा। आधे दिन की केजुअल लीव सेंक्शन करने को भी एजेंडे में शामिल किया गया है। एनसीसी को इलेक्टिव सब्जेक्ट बनाने के लिए यूजीसी से कम्युनिकेशन पर बात होगी। इसके अलावा भी कई मुद्दों को मीटिंग में रखा जाएगा। लेकिन सबसे अहम मुद्दा वित्तीय संकट का ही रहेगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी पर अभी भी पिछले वर्षों की 101 करोड़ रुपये की देनदारी है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मुश्किल से रिवाइज्ड बजट की मंजूर राशि मिल पाई है। वर्ष 2016-17 में पीयू ने रिवाइज्ड एस्टिमेट के तहत 277 करोड़ रुपये की मांग यूजीसी से की थी। लेकिन यूजीसी ने 100 करोड़ कम यानी 176 करोड़ रुपये की मंजूर किए थे। इस 176 करोड़ में से भी 44 करोड़ रुपये दो दिन पहले ही मिले हैं। लेकिन समस्या तो यह है कि 44 करोड़ मिलने के बाद भी केवल दिसंबर की सैलरी ही दी जा सकती है। जनवरी से मार्च तक की सैलरी देने के लिए कोई पैसा नहीं बचेगा। फैकल्टी की भी पीयू में काफी कमी है। टीचिंग और नॉन टीचिंग दोनों ही तरह के सैकड़ों पद खाली हैं। इस कारण स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। साथ ही काम भी प्रभावित हो रहा है। इन दिक्कतों को देखते हुए वीसी ने मीटिंग बुलाई है। पुटा ने अपने स्तर पर पीयू की मुश्किलें हल करवाने की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है। पुटा का प्रतिनिधिमंडल अगले कुछ दिनों में यूजीसी के अधिकारियों के साथ केंद्र सरकार तक यह मामला ले जाएगा।