पीजीआई में रिसर्च डे के मौके पर इमटेक के डायरेक्टर प्रो. अनिल कौल ने बताया कि भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में लगातार तरक्की कर रहा है। खासकर तीन से चार सालों में काफी तेजी देखी जा रही है। इनोवेशन तभी सक्सेस होगा जब उसमें नयापन होगा। ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए कि विदेश में कुछ हुआ और उस आइडिया को कॉपी कर उस पर काम कर दिया। नयापन लाने के लिए हमें रोज अभ्यास की जरूरत पड़ेगी। पेशेंट का भारी लोड होने के बावजूद अच्छे शोध करने पर पीजीआई को उन्होंने बधाई भी दी।
मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे सीएसआईआर न्यू दिल्ली के पूर्व डीजी प्रो. गिरीश साहनी ने सुझाव देते हुए कहा कि पीजीआई को अपनी समस्याओं पर की पहचान करनी होगी और उस मुद्दों के समाधान पर काम करना होगा। आंध्र प्रदेश स्थित श्री वेंकटेश्वरा इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के डायरेक्टर कम वाइस चांसलर प्रो. टीएस रवि कुमार ने पेशेंट केयर की गुणवत्ता में अनुसंधान के महत्व पर बल दिया। रिसर्च डे के मौके पर बेहतरीन रिसर्च करने वाले डाक्टरों को सम्मानित किया गया।
असिस्टेंट प्रोफेसर की कैटेगिरी में मेडिसिन की सहजल धूरिया, इंद्रपाल सहगल, विवेक कुमार, सर्जरी की किरण जांगड़ा, कोमल अनिल गांधी, पारुल चावला गुप्ता, पैरामेडिकल में मनीष रोहिला, मंजू डंडापानी, अशोक कुमार यादव को दिया। एडिशनल प्रोफेसर की कैटेगिरी में शंकर प्रिंजा, अश्विनी सूद, दीपांकर डे, सर्जरी में एसएस डंडापानी, दिव्या जैन, प्रेमा मेनन, पैरा मेडिकल की अनूप घोस, बलविंदर मोहन, प्रशांत शर्मा को दिया गया। प्रोफेसर की कैटेगिरी में रितेश अग्रवाल, अजय डुसेजा, कौशलजीत एस सोडी, सर्जरी में जतिंदर कौर मक्कर, बबिता घई, सुष्मिता कौशिक, भूपेश कुमार, एमआर शिवाप्रकाश, कुसुम शर्मा और मनीषा बिस्वाल की रिसर्च पर पुरस्कृत किया गया।