पंजाब विश्वविद्यालय के करीब 200 शिक्षकों को पीएचडी इंक्रीमेंट मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। पीयू प्रशासन ने यूजीसी की गाइड लाइन का दोबारा अध्ययन किया, लेकिन उसमें कोई रास्ता नहीं निकल रहा है। शिक्षकों को पीएचडी इंक्रीमेंट पहले दिया जाता था, लेकिन यूजीसी की गाइड लाइन के बाद जिन शिक्षकों ने 2014 तक पीएचडी की डिग्री ली है उनको इसका लाभ देना बंद कर दिया। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को आदेश जारी किए हैं कि वर्ष 2015 के बाद पीएचडी करने वाले शिक्षकों को इंक्रीमेंट का लाभ दिया जाए।
यह आदेश पीयू प्रशासन के पास भी पहुंचे तो शिक्षकों का इंक्रीमेंट रोक दिया गया, जबकि सीनेट और सिंडिकेट में यह प्रकरण मंजूर हो गया था। हालांकि नियमों की दुहाई देते हुए ऑडिट के स्तर से रोक लगा दी गई थी। मामला फिर शिक्षकों ने उठाया तो गाइड लाइन का फिर से अध्ययन करने की बात सामने आई। सूत्रों का कहना है कि पीयू प्रशासन ने फिर से गाइड लाइन देखीं, लेकिन उनमें कहीं भी लचीलापन नजर नहीं आ रहा है। हालांकि अब मामला कोर्ट में चला गया।
पदोन्नति भी पांच साल में
यूजीसी की नई गाइड लाइन में यह भी प्रावधान किया है कि वर्ष 2014 से पहले के पीएचडीधारी शिक्षकों को पदोन्नति पांच साल में मिलेगी। वहीं वर्ष 2015 के बाद के पीएचडी करने वाले शिक्षकों को चार साल में लाभ मिलेगा। यूजीसी का मानना है कि वर्ष 2015 के बाद की पीएचडी डिग्री अधिक प्रभावी है। उनके रिसर्च में गहराई है। साथ ही उनका चयन नियमत: किया गया है। सूत्र कहते हैं कि इससे पहले की डिग्रियों को शक की दृष्टि से देखा गया है।
शिक्षकों के वेतन के लिए हो सकता है बजट का टोटा
चालू वित्तीय वर्ष का बजट लगभग 500 करोड़ रुपये का रहा है। इसमें शिक्षकों का भी वेतन है। इस बजट में लगभग 226 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देती है। बाकी बजट का इंतजाम पीयू अपने से करता है। सूत्र बताते हैं कि शिक्षकों के वेतन के लिए बजट जनवरी के बाद कम पड़ सकता है। दो माह के वेतन की दिक्कत खड़ी हो सकती है। हालांकि पीयू प्रशासन वेतन का हिस्सा किसी दूसरे मद से निकालने की संभावना तलाश रहा है ताकि शिक्षकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।