पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय में एक फिर अध्यापन का काम कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने उन्हें जवाहरलाल नेहरू प्रोफेसरशिप के लिए आमंत्रित किया है।
संसद ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व पीएम और सांसद मनमोहन सिंह को मिला यह प्रस्ताव लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रोफिट) के दायरे में नहीं आता। गौरतलब है कि जुलाई में विश्वविद्यालय से प्रस्ताव मिलने के तुरंत बाद पूर्व पीएम ने राज्यसभा के सभापति से सलाह मांगी थी कि क्या इसे स्वीकार करने से उनकी राज्यसभा की सदस्यता चली जाएगी।
मनमोहन असम से राज्यसभा के सदस्य हैं। लाभ के पद मामले पर संसद की संयुक्त समिति ने 14 अक्तूबर को लोकसभा स्पीकर को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अगर पूर्व पीएम इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो इससे उनकी सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी।
मनमोहन सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की थी। उन्होंने इसी विश्वविद्यालय में 1963 से 1965 के बीच अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाया। चंडीगढ़ स्थित विश्वविद्यालय के कुलपति ने मनमोहन सिंह को सूचित किया था कि यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट और सीनेट ने जवाहरलाल नेहरू सेंटर के लिए उनके नाम पर मुहर लगा दी है।