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शिक्षकों की राय: डिग्री ही दिलवा सकती है ऑनलाइन शिक्षा, नौकरी के लिए आएगी बेहद मुश्किल

Fri, 11 Jun 2021 12:11 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़। 

सार

शिक्षक और विद्यार्थी के बीच में ऑफलाइन संवाद नहीं है, न ही शिक्षक अपने सामने विद्यार्थी को उसकी कमियों पर काम करने और उनमें सुधार करने के लिए समझा सकता है। इससे विद्यार्थियों का आंकलन नहीं हो पा रहा है। 
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ऑनलाइन शिक्षा - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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ऑनलाइन शिक्षा से कॉलेज के विद्यार्थियों को कोर्स की डिग्री तो मिल जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात देखते हुए नौकरी के लिए उन्हें अपने स्तर पर अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। ऑनलाइन शिक्षा नौकरी दिलवाने के काबिल नहीं है, क्योंकि ऑनलाइन शिक्षण में विद्यार्थी सिर्फ कोर्स का थ्योरी हिस्सा ही पढ़ रहे हैं, उन्हें व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पा रहा है।

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कॉलेज के प्रोफसरों ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षण में विद्यार्थी न के बराबर रुचि दिखा रहे हैं। परीक्षा में नकल कर पेपर पास किया जा रहा है। विद्यार्थियों की कक्षा हाजिरी अनिवार्य नहीं है, इसलिए बहुत से विद्यार्थी कक्षा नहीं लगाते हैं। इस समय नेटवर्क कनेक्टिविटी का सबसे अच्छा बहाना है।


हमारी भारतीय शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी पूरी तरह शिक्षकों पर निर्भर रहते हैं, इसका सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव ऑनलाइन शिक्षण में देखने को मिल रहा है। इस समय शिक्षक और विद्यार्थी के बीच में ऑफलाइन संवाद नहीं है, न ही शिक्षक अपने सामने विद्यार्थी को उसकी कमियों पर काम करने और उनमें सुधार करने के लिए समझा सकता है।

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संचार कौशल, आत्मविश्वास, अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों का अभाव

प्रोफसरों ने बताया कि ऑनलाइन शिक्षण में संचार कौशल, आत्मविश्वास, अवलोकन कौशल, अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियां, अनुशासन, खेल, टीम भावना आदि कौशल विकसित ही नहीं हो पाए हैं। डिग्री के साथ ये सब कौशल विद्यार्थी को नौकरी दिलवाने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।

शिक्षक के साथ विद्यार्थी की मेहनत जरूरी
ऑनलाइन शिक्षण में व्यावहारिक ज्ञान की कमी है। इसके साथ ही विद्यार्थियों का कैमरा बंद रहता है, इसलिए शिक्षकों को पता ही नहीं चल पाता है कि विद्यार्थी का कक्षा में ध्यान है या नहीं। इस समय में विद्यार्थी की खुद की मेहनत, पढ़ाई और कॅरिअर को लेकर गंभीरता बहुत जरूरी है। परीक्षा में सभी विद्यार्थी नकल के माध्यम से 90 से ऊपर अंक ले रहे हैं। - डॉ रूपिदंर कौर, प्रोफेसर, बायोटेक्नोलॉजी विभाग

विद्यार्थियों में कौशल नहीं हुए विकसित
ऑनलाइन शिक्षण में विद्यार्थियों में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कौशल का विकास नहीं हुआ है। भारतीय शिक्षण प्रणाली में विद्यार्थियों को पढ़ाना पड़ता है, वे आत्मप्रेरित नहीं है। अगर विद्यार्थी खुद स्पष्ट हों कि उन्हें भविष्य में क्या करना है तो वे ऑनलाइन शिक्षण में भी सीख सकते हैं, लेकिन विद्यार्थी नकल मारकर सिर्फ डिग्री लेने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। -डॉ. जगदीश मेहता, प्रोफसर, समाजशास्त्र विभाग
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व्यावहारिक ज्ञान के लिए खुद करनी होगी मेहनत

ऑनलाइन शिक्षण में व्यावहारिक ज्ञान की बहुत कमी है। इसके लिए विद्यार्थियों को खुद गंभीर होकर मेहनत करनी पड़ेगी, क्योंकि ऑनलाइन शिक्षण में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद की सबसे अधिक कमी है। कक्षाएं तो लग रही हैं, लेकिन उन कक्षाओं से विद्यार्थी ने कितना सीखा है, इसका आंकलन नहीं हो पा रहा है। विद्यार्थियों को इसके लिए खुद शिक्षकों से पूछना होगा या व्यावहारिक कौशल के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी ले सकते हैं। -डॉ. बीनू डोगरा, पूर्व प्राचार्या, पीजीजीजीसीजी-42

ऑनलाइन में विद्यार्थी की जिम्मेदारी बढ़ी
ऑनलाइन शिक्षण में विद्यार्थियों की अपने प्रति जिम्मेदारी बढ़ी है। शिक्षक रोजाना कक्षाएं ले रहे हैं। इसके साथ ही जो विद्यार्थी कक्षा नहीं लगा पाते, उनके लिए कक्षा ग्रुप में रिकार्डेड लेक्चर भी भेजे जाते हैं। अब यह विद्यार्थी पर निर्भर है कि वह उसे पढ़ रहा है या नहीं। कक्षा भी बहुत से विद्यार्थी गंभीरता से नहीं लगाते हैं। ऑनलाइन शिक्षण में व्यावहारिक विषयों की पढ़ाई ढंग से नहीं हो पा रही है। -लक्षित, एमए अंतिम वर्ष विद्यार्थी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
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