पंजाब यूनिवर्सिटी के कुछ अफसर अपने मतलब के कामों को रातोंरात निपटा लेते हैं, लेकिन बात जब शिक्षकों के हित की आती है तो फिर हीलाहवाली शुरू हो जाती है। कमियां भी खूब निकाली जाती हैं। इसी का उदाहरण आज सामने है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान यानी रूसा के तहत रिसर्च के लिए मिले 50 करोड़ रुपये शिक्षकों को नहीं बांटे गए।
यदि रकम समय रहते उन्हें मिल जाती तो वह लॉकडाउन के इस समय का रिसर्च के जरिये सदुपयोग कर रहे होते। पीयू को इस बार रूसा के तहत बड़ी रकम हाथ लगी थी। इसके लिए 147 शिक्षकों ने रिसर्च प्रोजेक्ट सौंपे थे। उनमें से बेहतर रिसर्च को छांटकर संबंधित शिक्षकों को पैसे आवंटित किए जाने थे। इसके लिए कमेटी बनाई गई और रिसर्च प्रोजेक्ट का चयन किया गया।
60 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट कमेटी ने फाइनल किए थे। इस कार्य के बाद शिक्षकों को प्रोजेक्ट की रकम दी जानी थी, लेकिन यह लॉक डाउन से पहले नहीं दी गई। कुछ शिक्षकों ने कहा है कि यह रकम समय से मिल जाती तो संबंधित शिक्षक आज घर पर रिसर्च का आधा काम निपटा लेते। साथ ही फाइंडिंग आदि का काम लॉकडाउन खुलने के बाद कर लेते लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिक्षकों ने कहा है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, उसकी जांच होनी चाहिए।