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नया स्कूल सेशनः इस बार भी अभिभावकों को करनी पड़ेगी ज्यादा जेब ढीली

Tue, 24 Jan 2017 07:45 PM IST
सुमित सिंह श्योराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
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स्कूल स्टूडेंट्स
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स्कूलों का नया सेशन शुरू होने को है और अभिभावकों को परेशानी अभी से बढ़ गई। इस बार भी उन्हें अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। शहर के प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में अगला सत्र (अप्रैल-2017) शुरू होने में दो महीने ही बचा है, लेकिन प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबों के बोझ से अभिभावकों को छुटकारा मिलने की संभावना कम होती दिख रही है।
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शहर करीब 75 प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाने वाले ट्राइसिटी के हजारों अभिभावकों की जेब महंगी किताबों की खरीद से फिर ढीली होगी। पूरा सत्र बीतने के बावजूद यूटी प्रशासन और शिक्षा विभाग प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में महंगी किताबों की खरीदारी पर रोक लगा पाने में नाकाम साबित हुआ है। प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों में एंट्री लेवल पर दाखिले की प्रक्रिया 10 फरवरी तक पूरी हो जाएगी।

शिक्षा विभाग मनमानी फीस की ही तरह सिलेबस से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें हटाने को लेकर कोई ठोस पॉलिसी तैयार नहीं कर पाया है। विभाग की सुस्त चाल ने अभिभावकों का गुस्से से भर दिया है। अभिभावक सड़कों पर उतर सकते हैं। प्राइवेट पब्लिशर्स के साथ प्राइवेट स्कूलों की मिलीभगत पहले की तरह अगले सत्र में भी जारी रहेगी। प्राइवेट किताबों में कमीशनखोरी का बड़ा खेल हो रहा है।
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लेकिन इस पर यूटी प्रशासन के आला अधिकारी आंखें बंद किए हुए हैं। लोगों का मानना है कि प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों के किलाफ यूटी प्रशासन के अधिकारी कोई भी कार्रवाई करने से डर रहे हैं। उधर शहर के प्राइवेट बुकशॉप्स को अभी तक नए सत्र से निजी पब्लिशर्स की जगह एनसीईआरटी किताबें लागू करने संबंधी कोई निर्देश भी जारी नहीं किए गए हैं।

10 स्कूलों में हुई थी छापेमारी, कार्रवाई अब तक नहीं

स्कूल स्टूडेंट्स
प्राइवेट स्कूलों में निजी पब्लिशर्स की किताबें लगवाने के मामले में अप्रैल 2016 से विरोध चल रहा है। शिक्षा विभाग ने इस मामले में 28 अप्रैल 2016 को शहर के 10 प्राइवटे स्कूलों सेक्टर-38 विवेक हाई स्कूल, सेक्टर-25 चितकारा,डीपीएस-40,चितकारा 25, सेंट स्टीफंस-45, हरकृष्ण पब्लिक स्कूल-40, स्टेपिंग स्टोन-37, स्टेपिंग स्टोन-38, किड्स आर किड्स और चंडीगढ़ बैपिस्ट स्कूल शामिल थे।

कार्रवाई सिर्फ नोटिस भेजने तक
छापामार टीम ने कई स्कूल कैंपस में ही बुकशॉप पकड़ी थी। मामले में सभी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने नोटिस भी जारी किया, लेकिन किसी भी स्कूल पर करीब 9 महीने बाद भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। 17 अप्रैल 2016 को शिक्षा विभाग ने शहर के 85 प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों को निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में लागू करने पर नोटिस जारी किया था। लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दिखावे के लिए बनी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपलों की कमेटी
चंडीगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन से जुड़े अभिभावकों ने महंगी किताबों के विरोध में यूटी शिक्षा सचिव के घर पर विरोध प्रदर्शन किया था। मामले को शांत करने के लिए 2 मई को डीपीआई स्कूल रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल की सेक्टर-19 गवर्नमेंट मॉडल स्कूल में मीटिंग बुलाई। मीटिंग में 11 प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल की अगले सत्र से सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें सिलेबस में लागू कराने को लेकर कमेटी गठित की गई।

कमेटी ने 2017 सत्र से शिक्षा विभाग के निर्देश पर ही किताबें सिलेबस में शामिल करने का वादा किया था। दिसंबर तक सभी स्कूलों को किताबों की शिक्षा विभाग से अप्रूवल लेनी थी। लेकिन जनवरी शुरू होने के बावजूद मामले में शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

एनसीईआरटी का सेट 600 में प्राइवेट पब्लिशर्स का 5 हजार तक

स्कूल स्टूडेंट्स
शहर के प्राइवेट स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स के साथ मिलकर अभिभावकों को जमकर लूट रहे हैं। एनसीईआरटी किताबों का जो सेट 400 से 600 रुपये में मिलता है, अभिभावकों को मजबूरी में उसी क्लास का सेट 4 से 5 हजार में खरीदना पड़ता है। प्राइवेट स्कूलों के बुक सेट के साथ कई अन्य सामान भी प्राइवेट बुकशॉप वाले खरीदने को मजबूर करते हैं।

सीबीएसई का सर्कुलर भी बेअसर
2016 में सीबीएसई ने सभी प्राइवेट स्कूलों को एनसीईआरटी किताबें ही सिलेबस में शामिल करने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन स्कूलों ने इन आदेशों पर कोई कार्रवाई नहीं की। सीबीएसई ने स्कूलों द्वारा किसी एक ही दुकान से किताबें खरीदने को बाध्य करने वाले स्कूलों की मान्यता तक रद्द करने का हवाला दिया था।

सीबीएसई नियमों के तहत कोई भी स्कूल कैंपस में किताबें नहीं बेच सकता। लेकिन स्कूल खुलेआम प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचते हैं। स्कूलों में  ड्रेस भी बेची जाती हैं। शिक्षा विभाग ने 16 अप्रैल 2016 को प्राइवेट स्कूलों द्वारा महंगी किताबें सिलेबस में लगवाने के मामले में चिट्ठी लिखी, लेकिन सीबीएसई दिल्ली और रीजनल सेंटर पंचकूला भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाया।

हाईकोर्ट के आदेशों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
9 अप्रैल 2013 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों की फीस और किताबों को लेकर रेगुलेशन और रेगुलेटरी बॉडी गठित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कोर्ट के आदेश के चार साल बाद भी कार्रवाई जीरो है। यूटी प्रशासन ने मामले में जस्टिस आरएस मोंगिया की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। लेकिन अभी तक जांच टीम ने शिक्षा विभाग को रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
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सरकारी स्कूल में मुफ्त किताबें, प्राइवेट में हजारों का सेट

स्कूल स्टूडेंट्स
शहर के सरकारी स्कूलों में हर साल नर्सरी से आठवीं तक करीब एक लाख स्टूडेंट्स को मुफ्त किताबें देता है। दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी का सेट 1500 से 2000 और आठवीं का सेट 5 हजार रुपये में खरीदना पड़ता है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों को एक निर्धारित बुकशॉप से ही किताबें खरीदने के लिए दाखिले के साथ ही पर्ची दे दी जाती है।

प्राइवेट स्कूल ऐसी किताबें सिलेबस में शामिल करते हैं जो सिर्फ स्कूलों द्वारा निर्धारित बुकशॉप पर ही मिलती हैं। उधर, शिक्षा विभाग की ओर से सभी प्राइवेट स्कूलों को किताबों की जानकारी नोटिस बोर्ड और स्कूल वेबसाइट पर डालने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कुछ ही स्कूल इन आदेशों को फालो कर रहे हैं।

बुकशॉप पर एनसीईआरटी किताबें नहीं मिलती
शहर के कई प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों का तर्क है कि शहर में एनसीईआरटी की किताबें पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलतीं। चंडीगढ़ में सेक्टर-19 स्थित एक प्राइवेट बुक सेलर के पास ही एनसीईआरटी का डिपो है। शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी को 3-4 नए डिपो खोलने के लिए चिट्ठी लिखी, लेकिन अभी तक विभाग अनुमति नहीं ले पाया है। एनसीईआरटी किताबें नहीं होने का प्राइेवट स्कूल भी बहाना बनाकर महंगी किताबें सिलेबस में शामिल कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने प्रशासन के पास पंजाब की फीस पॉलिसी को लागू करने का प्रपोजल भेजा है। इस मामले में अभी फाइनल अप्रूवल का इंतजार है। किताबों के मामले में फीस पॉलिसी के बाद ही कोई कार्रवाई होगी। 27 जनवरी को एडवाइजर के साथ फीस पॉलिसी पर अहम मीटिंग होनी है।
- रुबिंदरजीत सिंह बराड़ , डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन यूटी

यूटी प्रशासन जल्द ही पंजाब सरकार की ओर से जारी फीस पॉलिसी को लागू करेगा। नई पॉलिसी में प्राइवेट स्कूलों को निजी पब्लिशर्स की किताबें सिलेबस में न लगवाने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इस महीने के अंत तक पॉलिसी पर यूटी प्रशासन कोई फैसला ले लेगा।
- सर्वजीत सिंह, शिक्षा सचिव चंडीगढ़ प्रशासन
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