पंजाब यूनिवर्सिटी व पंजाब के सरकारी-सहायता प्राप्त कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती में दिए जाने वाले विभागवार आरक्षण पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। इसके लिए दूसरी व्यवस्था की गई है। संस्थानों में कुल रिक्तियों के आधार पर आरक्षण दिया जाएगा। यह नई व्यवस्था छह माह तक मान्य होगी। उसके बाद इस पर लोकसभा में बिल लाया जाएगा। अब तक पंजाब यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए विभागवार वेकैंसी निकलती थीं।
उसी आधार पर एससी-एसटी व अन्य वर्गों को लाभ दिया जाता था। हर सातवीं सीट एससी वर्ग के अभ्यर्थी के हिस्से में आती थी, लेकिन पिछले वर्षों में देशभर के कई संस्थानों में देखा गया कि विभागों में शिक्षकों की सीटें चार से छह तक निकल रही हैं। ऐसे में आरक्षित वर्ग के लिए सातवीं सीट आ ही नहीं पाती थी। सूत्रों का कहना है कि इसी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था को पलट दिया। हर संस्थान को एक यूनिट मानते हुए कुल रिक्त सीटों में से आरक्षण निकालते हुए अभ्यर्थियों को लाभ दिया जाएगा।
जैसे किसी संस्थान में शिक्षकों की 100 सीटें खाली हैं तो इसमें हर सातवीं सीट एससी के खाते में जाएगी। बाकी एसटी, ओबीसी, सर्वण गरीबों को दस फीसदी सीटें दी जाएंगी। बचीं सीटें सामान्य वर्ग के खाते में शामिल होंगी। हालांकि जानकार यह भी मान रहे हैं कि यह केवल चुनावी स्टंट है। चुनाव के बाद लोकसभा में बिल नहीं आया तो पुरानी व्यवस्था ही बहाल होगी।