चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों और सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की मेहनत रंग लाने लगी है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बढ़ा है। पिछले दो सालों में चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के परिणाम में 17.94 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसका मतलब है कि चंडीगढ़ के पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। 2017-18 में चंडीगढ़ का पास प्रतिशत 73.63, 2018-19 में 81.67 व इस बार 91.57 दर्ज किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो सालों में चंडीगढ़ के स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और उनके परफार्मेंस में काफी काम हुआ है। स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था की निगरानी रखने के लिए शिक्षा निदेशक ने एक कमेटी भी बनाई गई थी। इस कमेटी के सदस्य अचानक स्कूलों का दौरा करके विद्यार्थियों और शिक्षकों की परफॉर्मेंस की जांच करते हैं। स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी बढ़ाई गई है। वहीं शिक्षकों का समय पर प्रमोशन भी किया जा रहा है। इससे उनमें उत्साह बना रहता है।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस बार 40 सरकारी स्कूलों के 9601 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे। इनमें से सरकारी स्कूलों के 765 विद्यार्थियों ने 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए। 24 सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 90 प्रतिशत से ऊपर रहा है। सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 12वीं में 419 में से 201 विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत और इससे अधिक अंक हासिल किए हैं। ये विद्यार्थी साइंस, कॉमर्स और ह्यूमैनिटिज स्ट्रीम के हैं। स्कूल ने इस बार 100 प्रतिशत रिजल्ट दिया है।
इन पांच स्कूलों का रिजल्ट सबसे बेहतर
1. जीएमएसएसएस 16 100 प्रतिशत
2 जीएमएसएसएस एमएचसी 99.47 प्रतिशत
3. जीएमएसएसएस 19 98.51 प्रतिशत
4. जीएमएसएसएस 32 98.45 प्रतिशत
5. जीएमएसएसएस 21 98.20 प्रतिशत
पहली बार चंडीगढ़ रीजन का परिणाम, पंचकूला से मामूली पिछड़ा
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पहली बार चंडीगढ़ को अलग रीजन का दर्जा देकर 12वीं का परिणाम घोषित किया है। पिछले वर्ष तक पंचकूला रीजन के तहत चंडीगढ़ का परिणाम घोषित किया जाता रहा है। हालांकि इस बार चंडीगढ़ पंचकूला से पास प्रतिशत के मुकाबले पिछड़ गया है। पंचकूला का पास प्रतिशत 92.52 है, जबकि चंडीगढ़ का 92.04 फीसदी रहा।
चंडीगढ़ रीजन में कुल 98,166 विद्यार्थियों ने बोर्ड की परीक्षा दी। इनमें से कुल 90356 विद्यार्थी पास हुए। इनमें 48271 लड़के और 42085 लड़कियां पास हुई हैं। 94.39 प्रतिशत के साथ पास प्रतिशत में लड़कियों ने बाजी मारी है। वहीं लड़कों का पास प्रतिशत 90.09 फीसदी रहा है। चंडीगढ़ की बात करें तो यहां भी बेटियों ने बाजी मारी है।
सरकारी स्कूल पिछले सालों के रिजल्ट की तुलना में लगातार सुधार कर रहे हैं। इसका क्रेडिट विद्यार्थियों और शिक्षकों की मेहनत को जाता है। विभाग की तरफ से रिजल्ट सुधारने के लिए शिक्षकों की नई भर्ती के साथ समय पर प्रमोट भी किया जा रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता व सुपरविजन में भी सुधार किया गया है।
- रूबिंदरजीत सिंह बराड़, शिक्षा निदेशक, यूटी