10वीं या 12वीं के बाद यदि आप पॉलीटेक्निक में करियर बनाने की सोच रहे हैं तो जानिए लिजिए कि एडमिशन सिस्टम बदल गया है। टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में सिविल से लेकर मैकेनिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग आदि ऐसे कई ट्रेड हैं, जिन्हें करने के बाद आपके लिए रोजगार की राह आसान होगी।
10वीं बेस पर तीन साल और 12वीं के बाद यह सभी ट्रेड दो साल के हैं। इनके बाद न केवल प्राइवेट सेक्टर, बल्कि गवर्नमेंट सेक्टर में रोजगार के विकल्प खुल जाएंगे। वहीं, मल्टीनेशनल कंपनियों में भी अच्छे वेतन पर आप जॉब पा सकते हैं।
प्रवेश के लिए अब नहीं देना होगा एंट्रेंस
टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र को और बेहतर बनाने के लिए हरियाणा स्टेट टेक्निकल एजुकेशन ने इस बार प्रवेश प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, अभी तक एडमिशन लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रदेश स्तरीय एंट्रेंस एग्जाम देना होता था।
एग्जाम के डर से कई बार विद्यार्थी मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाते थे। जिस कारण विद्यार्थियों का रुझान थोड़ा कम हो गया था, लेकिन इस सत्र से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने एंट्रेंस का सिस्टम ही खत्म कर दिया। एडमिशन लेने के लिए विद्यार्थियों को एंट्रेंस देने की जरूरत नहीं होगी। 10वीं के अंकों के आधार पर मेरिट बेस पर प्रवेश हो सकेंगे।
15 अगस्त तक होंगे प्रवेश
डीयू दाखिला
नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। छात्र को पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद डिपार्टमेंट की तरफ से अधिकृत सरकारी और गैर सरकारी पॉलीटेक्निक में जाकर अपने दस्तावेज वैरिफाई कराने होंगे। इस प्रक्रिया के बाद छात्र की काउंसिलिंग होगी, तब जाकर मेरिट बेस पर प्रवेश होंगे।
जिले में सात पॉलीटेक्निक सरकारी, गैर सरकारी और प्राइवेट
जिले की बात करें तो यहां पर सांघी, महम और सांपला में सरकारी पॉलीटेक्निक है, जबकि रोहतक में सीआर पॉलीटेक्निक और वीटीआई गैर सरकारी। इसके साथ ही, सांपला, किलोई, मोरखेड़ी और करौंधा में प्राइवेट पॉलीटेक्निक है। रोहतक सीआर पॉलीटेक्निक में सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल में 120-120 सीटें हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर इंजीनियरिंग और प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में 60-60 सीटें हैं।
पॉलीटेक्निक में फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इस क्षेत्र में छात्रों के लिए रोजगार के ढेरों विकल्प हैं, जिन्हें छात्र अपनी इच्छानुसार चुन सकता है। बशर्ते, इसके लिए छात्र को अच्छी मेहनत करनी होगी।
- बलजीत सिंह हुड्डा, प्राचार्य सीआर पॉलीटेक्निक