निजी और सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग ने एक बेहद अहम फरमान जारी किया है। ध्यान से पढ़ लें, वरना पछताना पड़ सकता है। हरियाणा सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कस दी है।
कोई भी निजी या सरकारी स्कूल किसी छात्र को स्कूल छोड़ने या स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करते समय मासिक या त्रैमासिक शुल्क जमा कराने के लिए तब तक बाध्य नहीं करेगा, जब तक वह दूसरे स्कूल में प्रवेश लेने के लिए आवेदन नहीं करता है।
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं स्कूल मुखियाओं को ये निर्देश जारी कर दिए हैं। निदेशालय के संज्ञान में आया है कि आमतौर पर कुछ स्कूल छात्र के पास होने पर सहमति के बिना ही उसे अगली कक्षा में प्रवेश दे देते हैं।
जब छात्र नए सत्र के पहले दिन ही स्कूल छोड़ने के लिए आवेदन करता है तो उससे पूरे माह या तिमाही की फीस वसूली जाती है। छात्र के स्कूल छोड़ने पर उससे प्रवेश के समय ली गई अग्रिम राशि 500 रुपये ही रखी जा सकती है। उससे अधिक राशि छात्रों को लौटानी होगी। बावजूद इसके कोई शिकायत मिलती है तो अग्रिम राशि लौटाने के लिए स्कूल मुखिया व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेवार होंगे।