पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा 94 सीनेटरों की असहमति के कारण नहीं मिल पाया है। इसी कारण 100 करोड़ रुपये की ग्रांट भी रुकी हुई है। जबकि केंद्रीय यूनिवर्सिटियों को यह ग्रांट मिल रही है। पीयू में 7वां वेतन आयोग लागू नहीं सका है। पीयू में सातवां वेतन आयोग लागू करवाने के लिए वीसी एमएचआरडी मिनस्टिर से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अभी सिर्फ आश्वासन ही मिला है। पीयू की सीनेट और सिंडीकेट की मीटिंग में फंड की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। सभी सीनेट मेंबर्स पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने के लिए सहमत नहीं हुए।
चुनाव के समय उठते हैं मुद्दे
पीयू की ओर से पुटा चुनाव में भी प्रोफेसर्स की ओर से यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन सीनेट के मेंबर्स की ओर से अगर इस पर सहमति मिल गई होती तो यह लागू भी हो जाता। पीयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर राज कुमार से सातवां वेतन आयोग लागू करवाने को लेकर पुटा प्रधान राजेश गिल की ओर से ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन इसके आड़े फंड की कमी आ रही है।
बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक में पीयू का बजट 28 करोड़ बढ़ा दिया गया है। लेकिन सातवां वेतन आयोग लागू करने के लिए यह बजट चाहिए। पीयू की ओर से इसके अंतर्गत एक हजार से अधिक कर्मचारी आते हैं। पीयू के पर्वू वीसी अरुण ग्रोवर ने सीनेट में यह मांग की गई कि पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाया जाए, लेकिन सीनेट और सिंडीकेट के मेंबर्स की सहमति नहीं बन पाई। इसलिए इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई।