पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फ्लाईओवर से 100 मीटर दूर बसें खड़ी करने के आदेश पर प्रशासन हरकत में आया।
इस पर प्रशासन के अधिकारियों, हाईवे अथॉर्टी, यातायात पुलिस व बिजली विभाग के अधिकारियों ने वीरवार को बस स्टैंड के लिए प्रबंध करने के लिए मीटिंग की।
अधिकारियों ने फिलहाल मैट्रो माल के सामने बसें खड़ी करने की जगह निश्चित की है। अधिकारियों ने कहा बसों को सवारियों को उतारने व चढ़ाने के लिए इस स्थान का उपयोग किया जाए।
इस फैसले के साथ जीरकपुर की यातायात की समस्या में कुछ हद तक निजात मिलने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के निर्देशों पर पहले लंबे रूट की बसों का शहर में दाखिल होनी बंद हो गई थीं। इस पर बसें फ्लाईओवर के दोनों ओर सवारियों को उतारने-चढ़ाने लगी थीं।
इसके बाद हाई कोर्ट ने फ्लाईओवर से 100 मीटर दूर बसों खड़ी करने का आदेश दिया था।
साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिए थे कि वह सभी हालातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रबंध करें, जिससे ना तो यातायात प्रभावित हो और ना ही लोगों को परेशानी हो।
इसको देखते हुए सभी विभागों की एक संयुक्त मीटिंग हुईं।
इसमें नेशनल अथॉर्टी के प्रोजेक्टर डायरेक्टर ओसी माथुर, नगर कौंसिल के ईओ पीएस सराअओं, इंजीनियर कुलदीप राज वर्मा, टाउन प्लानर संजय टंडन, जीरकपुर ट्रैफिक इंचार्ज गुरविंदर सिंह सिद्घू, बिजली विभाग के सीनियर कार्यकारिणी इंजीनियर एमपी सिंह, उप मंडल अफसर इंदरप्रीत सिंह सहित कुछ और स्थानीय अधिकारियों ने मीटिंग में भाग लिया।
इस मौके नेशनल हाईवे अथॉर्टी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ओसी माथुर ने कहा कि यह आरजी बस स्टैंड है व इस का निर्माण स्थानीय प्रशासन की ओर से किया जाएगा और हाईवे अथॉर्टी उन्हें सहयोग देगी।
नगर कौंसल जीरकपुर के ईओ पीएस सराओं ने बताया दिल्ली की ओर से आने वाली बसों को मैट्रो माल के आगे स्लिप रोड पर सवारियों को उतारेंगी।
इसके बाद फ्लाईओवर से चंडीगढ़ जाएंगी। वहीं, चंडीगढ़ से आने वाली बसें मैरीलैंड होटल से आगे स्लिप रोड पर सवारियों को बैठाएंगी।
इन प्रबंधों के लिए इस स्थान से बिजली के तारों व ट्रांसफार्मर को हटाने का काम बिजली विभाग करेगा। अधिकारियों के अनुसार सभी विभाग आपसी तालमेल कर आरजी बस अड्डे का निर्माण निधारित समय के अंदर पूरा करने का हर संभव प्रयास करेंगे।
ऑटों वालों की होगी चांदी
मैटो के पास आरजी बस अड्डा बनने से सवारियों को परेशानी उठानी पड़ेगी। क्यों कि बसें सवारियों को एक एक किलो मीटर पहले उतार देंगी। इससे लोगों को आवागमन में दिक्कत होगी। इससे सवारियों को ऑटो का सहारा लेना पड़ेगा।