वित्त विभाग ने सरकारी व अर्द्घसरकारी संस्थानों, बोर्डो, आयोगों, सोसाइटियों के लिए उपरोक्त आदेश जारी करने के साथ ही राज्य के लेखा व खजाना निदेशक और सभी जिला खजाना अधिकारियों को भी हिदायत जारी की है कि सरकार ने राज्य के खजानों में बजट कंट्रोल सिस्टम लागू कर दिया गया है, इसलिए उपरोक्त खर्चों में किफायत बरतने के उपाय को लागू करने के लिए विभागों द्वारा ऐसे कार्यक्त्रस्मों के जो भी बिल खजाने में पेश किए जाएं, उनकी मंजूरी निर्धारित किए गए बजट-कट के अनुसार की जाए। इसके साथ ही वित्त शाखाओं के सभी सुपरिटेंडेंट से कहा गया है कि अगर किसी विभाग द्वारा उक्त आदेशों का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पेश किया जाए। दरअसल, वित्त विभाग ने यह भी माना है कि विभागों द्वारा जो भी खर्च किए जाते हैं, उनकी रसीद कम जेनरेट की जा रही हैं।
वेतन, पेंशन और ब्याज अदायगी पर सारा जोर
जनवरी के पहले हफ्ते में, वित्त विभाग की बजट शाखा-1 द्वारा राज्य से सभी विभाग प्रमुखों, सभी डिवीजनों के कमिश्नरों और डिप्टी कमिश्नरों को भेजे पत्र में कहा गया था कि सभी विभागों के लिए वेतन, पेंशन, बिजली के बिल और कर्ज की अदायगी को छोड़कर बाकी सभी तरह के खर्च में 20 फीसदी कटौती कर दी गई है। वर्ष 2019-20 के दौरान कोई भी विभाग किसी भी नए कार्य के लिए टेंडर जारी नहीं करेगा और विभागों को वर्तमान में जारी विकास कार्यों पर ध्यान देने को कहा गया था। इसके साथ ही विभागों को यह हिदायत भी दी गई कि अगर किन्हीं आपात स्थितियों में किसी कार्य के लिए कोई टेंडर जारी करना अपरिहार्य हो, तो उसके लिए अनुमति वित्त विभाग से ली जाए। इसके साथ ही, विभागों को ताकीद दी गई है कि वे विभाग के लिए कोई भी नया साजो-सामान न खरीदें।
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