इसके लिए विभिन्न संगठनों के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग भी की गई थी। लेकिन आम बजट में निराशा ही हाथ लगी। फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के जुड़े विशेषज्ञ जीडी छिब्बर के अनुसार आयकर स्लैब को छोड़ दिया जाए, तो प्रदेश के किसी भी लघु, सूक्ष्म व मध्यम को बूस्टअप देने के लिए आम बजट में कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। प्रदेश के विभिन्न उद्योग जबरदस्त मंदी के दौर से गुजर रही हैं, ऐसे में केंद्र सरकार से विशेष पैकेज के रूप में उद्योगों के लिए ‘संजीवनी’ की उम्मीद थी, लेकिन वे भी टूट गई।
जिले निर्यात केंद्र तो बनेंगे, मगर उद्यमियों को अभी सीधा कुछ खास नहीं
आम बजट की घोषणा के तहत हरियाणा के सभी 22 जिलों को निर्यात केंद्र के तौर पर विकसित किया जाना है। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारों के प्रयासों के बीच तालमेल बिठाया जाएगा। इसके लिए संस्थागत मैकेनिज्म को भी सृजन किया जाएगा। इसका मकसद है स्थानीय उद्यमियों व मैन्युफेक्चरर्स के लिए बाहरी बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर प्रदान करना।
मगर विशेषज्ञ डा. आरआर मलिक बताते हैं कि सरकार की ये सोच सकारात्मक है, मगर अभी इस दिशा में प्रयास भी शुरू नहीं हुए हैं। जब ऐसे प्रयास पूरी तरह से स्थापित होंगे, तभी उद्यमियों को कुछ लाभ मिल पाएगा। अभी उन्हें बजट से कोई सीधा लाभ नहीं मिला है। बताते चलें कि अभी हरियाणा के बड़े मध्यम व बड़े उद्योग सलाना 89006.17 करोड़ का निर्यात करते हैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने बताया केंद्र सरकार की ओर से 2020-21 के लिए पेश किया गया बजट पूर्ण रूप से किसान विरोधी है। इसमें समर्थन मूल्य पर फसल खरीद गारंटी का कानून बनना चाहिए था। किसान की कम से कम 18 हजार रुपये मासिक आय सुनिश्चित करने का प्रावधान करना चाहिए था।
उनके अनुसार किसानों की बढ़ती आत्म हत्याओं को रोकने के लिए कर्ज मुक्ति करने की घोषणा होनी चाहिए थी। केसीसी को ब्याज मुक्त करना चाहिए था। इस बजट से किसान आर्थिक तंगी के और भंवर में फसेंगा। भारतीय किसान यूनियन इस बजट से निराश है।
उधर, किसान नेता राकेश बैंस ने कहा कि कृषि सेक्टर और रूरल डेवलपमेंट, पंचायती राज में इस साल का आवंटन बजट के हिस्से का 9.3 प्रतिश है, जो की पिछले साल के बजट में 9.6 प्रतिशत था। उनके अनुसार इस बार कृषि सेक्टर, रूरल डेवलपमेंट व पंचायती राज को पैसा भी कम दिया गया है। किसानों की खेती की लागत कम करने के लिए कोई खास रोडमैप दिखाई नहीं दिया।
आम बजट में किसानों के लिए जो 16 सूत्रीय फार्मूले का ऐलान किया गया है, उसके तहत होने वाले प्रयासों से फिलहाल किसानों को कोई सीधा लाभ नहीं मिल रहा है। इस तरह वर्ष 2022 तक किसानों की आय किस प्रकार दोगुनी होगी।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष व हरियाणा कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह धनखड़ ने इस बजट को कर्मचारी विरोधी बताया। उन्होंने बताया कि इस केंद्रीय बजट से नौकरीपेशा लोगो को केवल और केवल निराशा हाथ लगी है, क्योंकि आमजन के साथ साथ कर्मचारी वर्ग को भी इस बजट से काफी उम्मीदें थीं।
बजट में में कहीं भी नए रोजगार सृजित करने, देश के 60 लाख एनपीएस पीड़ित कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति बहाल करने, स्वरोजगार योजनाओं की पूरी तरह अनदेखी रही। उनके अनुसार न ही रेलवे, बीमा, बैंकिंग, परिवहन और बिजली जैसे उपक्रमों का बजट बढ़ाने की कोई व्यवस्था की गई है। इंटक से जुड़ें कर्मचारी नेता प्रदीप कुमार बूरा ने बताया कि आम बजट से कर्मचारी और नौकरी पेशा वर्ग असंतुष्ट हैं। उनकी कई मांगे थी, जिस पर सरकार फोकस करते हुए उनके लिए कुछ अच्छी घोषणाएं करनी चाहिए थी।
लंबित रेल परियोजनाओं के लिए कुछ खास नहीं
हरियाणा में एक दर्जन के करीब रेल परियोजनाएं ऐसी है, जो पिछले बजट की घोषणाओं का हिस्सा है। मगर आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। जनहित में ये रेल प्रोजेक्ट बड़े महत्वकांक्षी हैं। मगर फंड की कमी की वजह से ये परियोजनाएं अभी तक लटकी हुई हैं। इन परियोजनाओं केलिए हर साल आम बजट में कुछ बजट अलॉट हो जाता है, जो कि नाकाफी रहता है।
हरियाणा के लोगों को आस थी कि इस बजट में कम से कम इतना पैसा जरूर मिल जाएगा कि ये रेल परियोजनाएं सिरे चढ़ जाएंगी। मगर ऐसी कोई खास बढ़ी घोषणा नहीं हुई। लिहाजा ये रेल परियोजनाएं अभी और आगे सरकेंगी और कब सिरे चढ़ेगी, इस बारे में कुछ अभी तक कुछ भी साफ नहीं है। रेलवे के आला अफसरों के अनुसार वे भी अभी केंद्र की ओर से रेल परियोजनाओं के लिए क्या कुछ हासिल हुआ है, ये जानने के लिए इंतजार कर रहे हैं।