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ब्रिगेडियर संत सिंह पंचतत्व में विलीन, पोते ने दी मुखाग्नि

Fri, 11 Dec 2015 01:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पाकिस्तान सेना को घुसकर मारने वाले ब्रिगेडियर संत सिंह सैन्य सम्मान के साथ वीरवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पोते मनवीर सिंह रंधावा ने सेक्टर 25 के श्मशानघाट पर मुखाग्नि दी।
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इस दौरान पंजाब के कई प्रशासनिक अधिकारी व आर्मी के पूर्व अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था, जबकि संत सिंह वार हीरो के अलावा चंडीगढ़ नगर निगम में मनोनीत पार्षद भी रहे। प्रशासन की इस बेरुखी पर कुछ पूर्व आर्मी आफिसरों ने नाराजगी भी जताई है।

95 वर्षीय ब्रिगेडियर संत सिंह का निधन बुधवार को हो गया था। दिल की बीमारी के बाद उन्हें मोहाली के फोर्टिस हास्पिटल में एडमिट कराया गया। संत सिंह अपनी बेटी सतिंदर कौर और दामाद ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) सरबजीत रंधावा के साथ चंडीगढ़ सेक्टर 36 में रहते थे।
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जिस यूनिट के साथ पहाड़ी कब्जाई थी, उस यूनिट ने दी श्रद्धांजलि
दो नवंबर 1965 को ब्रिगेडियर संत सिंह 5 सिख लाइट इंफैंट्री का नेतृत्व कर रहे थे। पाकिस्तान की ओर से लगातार फायरिंग हो रही थी। उन्हें आदेश हुआ कि पाकिस्तान की कब्जे वाली ओपी हिल्स को आजाद कराना है। वे अपनी यूनिट के साथ आगे बढ़े और उसको कब्जे में ले लिया।

अंतिम संस्कार के दौरान पठानकोट से 5 सिख लाइट इंफैंट्री यूनिट के कमांडिंग आफिसर कर्नल के संदीप कुमार अपने जवानों के साथ पहुंचे। उन्होंने बताया कि ब्रिगेडियर संत सिंह यूनिट के लिए हमेशा से प्रेरणास्रोत रहे हैं।

अंतिम संस्कार के दौरान बरसने लगीं बूंदें
ब्रिगेडियर संत सिंह का जब अंतिम संस्कार किया जा रहा था, उसी दौरान आसमान से बूंदें गिरने लगीं। ऐसा लग रहा था कि आसमान भी ब्रिगेडियर संत सिंह को अपनी श्रद्धांजलि दे रहा हो। अंतिम संस्कार के बाद बूंदाबांदी बंद हो गई।

अंतिम यात्रा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख वीपी मलिक, ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी, पंजाब मुख्यमंत्री के स्पेशल प्रिंसिपल सेक्रेटरी केजेएस चीमा, पंजाब डिफेंस सर्विस वेलफेयर बोर्ड के डायरेक्टर ब्रिगेडियर (रि)जेएस अरोड़ा, मोहाली एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर सहित कई लोग मौजूद रहे। इसके अलावा पंजाब मुख्यमंत्री, पंजाब कांग्रेस प्रेसिडेंट, वेस्टर्न कमांड सहित कई अन्य की तरफ से श्रद्धांजलि दी गई।

दो बार मिला था महावीर चक्र
ब्रिगेडियर संत सिंह को दो बार महावीर चक्र से नवाजा गया था। एक बार उन्हें 1965 युद्ध में महावीर चक्र मिला था, जबकि दूसरी बार 1971 युद्ध में। उन्होंने सेकेंड वर्ल्ड वार, 1947-48 व 1962 के चीन युद्ध में भी हिस्सा लिया था। उनका नाम का प्रस्ताव एक और महावीर चक्रव परमवीर चक्र के लिए भी किया गया था, लेकिन वे रिटायर हो गए थे। मेंढर सेक्टर में उनके नाम पर एक कैंटोनमेंट का नाम भी रखा गया था।

कोट
ब्रिगेडियर संत सिंह फौज के एक बहादुर सिपाही थे। उनकी बहादुरी पर ही उन्हें महावीर चक्र मिला था। देश के इस महान योद्धा को नहीं भुलाया जा सकता।
वीपी मलिक, पूर्व सेना प्रमुख

कोट
मुझे यह देखकर काफी धक्का लगा कि संत सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान न तो चंडीगढ़ प्रशासन का कोई अधिकारी शामिल हुआ और न ही नगर निगम का । वे आखिरी ऐसे सैनिक थे, जिन्हें दो बार महावीर चक्र से नवाजा गया था। यह दर्शाता है कि देश की पावरफुल लॉबी उन लोगों को कितना आदर सत्कार करती है, जो देश की रक्षा के लिए अपनी और परिवार की परवाह किए बिना बार्डर पर लड़ते हैं।
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रिटा. मेजर डीएस संधू पार्षद नगर निगम
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