रुपये लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले दलालों के संबंध विजिलेंस ने रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के पूर्व ब्रांच इंचार्ज के साथ पाए गए है। दूसरे विभाग में पोस्टिंग होने के बावजूद ब्रांच इंचार्ज का सिक्का आरएलए में खूब चल रहा था।
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फाइलें पास करवाने के लिए कई दलाल आरएलए में मौजूद कर्मचारियों को पूर्व ब्रांच इंचार्ज से फोन करवाते थे। ब्रांच इंचार्ज इन कंप्यूटर आपरेटर से बातचीत पीयन के मोबाइल फोन के जरिए करते थे।
पकड़े गए दलाल सोनू के मोबाइल फोन से दो पूर्व ब्रांच इंचार्ज के साथ बातचीत की डिटेल निकली है। पूर्व ब्रांच इंचार्ज के नामों का खुलासा होने के बाद विजिलेंस ने सोमवार को आरएलए के पूर्व ब्रांच इंचार्ज जार्ज जोश और पीयन राकेश व विनोद को पूछताछ के लिए दफ्तर बुलाया। विजिलेंस टीम ने तीनों से करीब चार घंटे तक पूछताछ की।
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पूछताछ और रिकॉर्ड से सामने आईं कई बातें
विजिलेंस ने प्राथमिक जांच में पाया कि दलाल पूर्व ब्रांच इंचार्ज जार्ज जोस और मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) से फाइलें पास करवाने के लिए संपर्क करते थे। पकड़े गए दलाल सोनू के मोबाइल से इन दोनों के नंबर व बातचीत भी पाई गई है।
विजिलेंस ने जब जार्ज जोस की पोस्टिंग का रिकार्ड निकाला तो उनकी पोस्टिंग आरएलए में पाई गई है। जार्ज जोश आरएलए में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की ब्रांच का इंचार्ज 2011 से 2012 तक रहा।
इसके बाद जार्ज जोस 2013 से 14 में दुबारा आरएलए दफ्तर पहुंच गया था। एक साल के लिए उनकी पोस्टिंग नीचे आरसी बनाने वाली ब्रांच में की थी।
यहीं नहीं पीयन राकेश और विनोद ने विजिलेंस पूछताछ में बताया कि दलालों के संबंध पूर्व अफसरों के साथ थे। मंगलवार को विजिलेंस टीम मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर(एमवीआई) को पूछताछ के लिए बुलाएगी।
विजिलेंस ने एक साल का रिकार्ड किया जब्त
दलालों के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के मामले में विजिलेंस ने सोमवार को आरएलए से रिकार्ड जब्त किया है। रिकार्ड लेने के लिए विजिलेंस की टीम आरएलए से पहुंच गई थी। विजिलेंस टीम आने से आरएलए के कर्मचारियों में हड़कंप में मंच गया। विजिलेंस टीम अब जब्त किए गए रिकार्ड खंगाल रही है।
आरएलए इंचार्ज ने किया था जार्ज जोश का तबादला आरएलए इंचार्ज कशिश मित्तल ने विभाग का चार्ज लेते ही आरएलए आफिस में काफी गड़बड़ी पाई गई थी। दलालाें द्वारा विभाग के कर्मियों के साथ मिलकर लाइसेंस बनाने की बात सामने आई थी। जिसके बाद कशिश मित्तल ने ड्राइविंग लाइसेंस के ब्रांच इंचार्ज जार्ज जोश का तबादला करवा दिया था। जार्ज जोश का तबादला मैरिज रजिस्ट्रेशन की ब्रांच में कर दिया गया था।
दलालों द्वारा लाइसेंस बनाने के मामले में कई आरएलए के पूर्व ब्रांच इंचार्ज की भूमिका संदेह में आ रही है। जांच में कई दलालों के संबंध ब्रांच इंचार्ज के साथ पाए गए है। विजिलेंस मामले की गहनता से जांच करने में लगी हुई है। गुरजीत कौर, प्रभारी विजिलेंस विभाग
रोज अंडर टेबल कमाते हैं पांच से दस हजार
रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के कर्मचारी दलालों के साथ मिलकर हर रोज पांच से दस हजार रुपये की से ज्यादा कमाई करते थे। एक फाइल पास करने के कर्मचारी एक हजार से 1500 के बीच रुपये लेते थे।
इस चक्कर में आरएलए के कर्मचारी फाइल में लगे कागजात को भी वेरीफाइ नहीं करते थे। कई लोगों के तो दलालों ने जाली रेजीडेंट प्रूफ पर ही चंडीगढ़ का लाइसेंस बना डाला। यह खुलासा पकड़े गए दलाल सोनू ने विजिलेंस से किया।
सोनू ने बताया कि वह हर रोज करीब दस लाइसेंस आरएलए कर्मचारियों के द्वारा बनवाता था। उसके जरिए लाइसेंस बनवाने वाले को किसी प्रकार का कोई टेस्ट नहीं देना होता था।
विजिलेंस ने दलाल सोनू और पीयन राकेश को शनिवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। गिरोह के अन्य सदस्य पकड़ने के लिए विजिलेंस ने दोनों आरोपियों का रिमांड मांगा। अदालत ने दोनों का एक दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।
ऐसे चलता था खेल
आरएलए का प्रभार संभालते ही कशिश मित्तल ने आदेश जारी किए थे कि कंप्यूटर पर डाटा एंट्री करने वाले कर्मचारियों के मोबाइल फोन ड्यूटी पर आते ही उनसे ले लिए जाएं। उसके बाद से इन कर्मचारियों ने दलालों से संपर्क साधने का नया तरीका निकाला।
इसके लिए पियन और सफाई कर्मचारियों की मदद ली जाने लगी। दलाल लर्निंग लाइसेंस के टेस्ट में पास होने और बिना रेजीडेंट प्रूफ के लाइसेंस बनाने के लिए तीन से पांच हजार रुपये मांगते थे।
सौदा होने के बाद दलाल आरएलए के पीयन के माध्यम से डाटा आपरेटर से संपर्क करता था। दलाल फाइल पास करने के लिए डाटा एंट्री आपरेटर को 1500 रुपये देता था। ऑपरेटर तक फाइल पहुंचाने के लिए 500 रुपये पीयन या सफाई कर्मी को दिए जाते थे।
आरएलए के बाहर लोगों से रुपये लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बनाने वाले दलालों की लिस्ट विजिलेंस तैयार कर रही है। ज्यादातर सभी दलालों के नाम और पते विजिलेंस को मिल गए हैं। जल्द ही विजिलेंस इन पर भी शिकंजा कसेगा।
नाम सामने आता है पर कार्रवाई नहीं होती दो साल पहले विजिलेंस टीम ने जाली कागजात पर और ड्राइविंग टेस्ट के लिए डीएसपी के फर्जी साइन करके ड्राइविंग टेस्ट बनाने वाले दलाल और नगर निगम के कर्मचारी को पकड़ा था। विजिलेंस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
जांच में चंडीगढ़ पुलिस के कई कर्मचारियों के नाम आए थे, लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद ही आरएलए के कर्मचारियों के मोबाइल फोन ड्यूटी पर आने के बाद जमा करवा लिए जाते थे।