लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने के बाद पीजीआई में दो गंभीर मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई, वहीं दो मरीजों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया। अकेले नमन ने पांच लोगों के जीवन को बचाया। अमनदीप सिंह के गुर्दे दो मरीजों और कॉर्निया दो मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। बलिंदर सिंह ने गुर्दे की बीमारी से पीड़ित दो रोगियों को नया जीवन दिया। इनके परिजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने कहा कि इस दुख की घड़ी में दूसरों के जीवन को बचाने और समृद्ध करने के लिए निर्णय लेना कठिन है। डायरेक्टर ने पीजीआई की टीम को भी इस सफल कार्य के लिए बधाई दी। चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल ने कहा कि हर साल आधा मिलियन भारतीय अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हुए मर जाते हैं, क्योंकि कोई उपयुक्त दाता नहीं मिल पाता है।
मवेशी से टकरा कर घायल हो गया था नमन
22 नवंबर को नमन गाड़ी से जा रहा था। तभी एक मवेशी के सामने आ गया। उसे उसका स्कूटर टकरा गया जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई थी। परिजन उसे तत्काल पीजीआई लेकर गए। लगभग दो सप्ताह तक चले इलाज के बाद पांच दिसंबर को डॉक्टरों ने उसका ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इस दुख की घड़ी में उनके पिता सेवा राम और पत्नी ईशा ने अपने व्यक्ति के अंगदान करने का कठिन निर्णय लिया। नमन के परिजनों ने कहा कि उनके जैसा दुख अन्य किसी परिवार को न हो इसलिए उन्होंने इस पुण्य काम में भाग लिया।
काम से जाते समय फिसली बाइक से आई अमनदीप को चोट
22 नवंबर को पंजाब के गांव लोधीपुर में अमनदीप सिंह बाइक से कहीं जा रहा था। इस दौरान उसकी बाइक अचानक फिसल गई। उसका सिर तेजी से सड़क पर जा टकराया जिससे उसे गंभीर चोट आई। वह मौके पर ही बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल पीजीआई लेकर आए। 11 दिनों तक चले इलाज के बाद 3 दिसंबर डॉक्टरों ने सका ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अमनदीप सिंह के पिता कुलदीप सिंह ने कहा कि उनका बेटा निस्वार्थ भाव से काम करता था। अंगदान के फैसले से हमें तसल्ली होगी कि वह हमारे ही बीच है।
मॉर्निंग वॉक पर अज्ञात वाहन ने मारी थी बलिंदर सिंह को टक्कर
पटियाला के मंडोली गांव के बलिंदर सिंह मॉर्निंग वॉक पर गए थे। इस दौरान उन्हें पीछे से किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। परिजन उन्हें राजिंदरा अस्पताल लेकर गए। उनकी तबीयत में कोई सुधार न होने पर एक दिसंबर को उन्हें पीजीआई रेफर किया गया। दो दिसंबर को डॉक्टरों ने उनका ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। उनके पिता बलिंदर सिंह ने कहा कि बेटे की याद जीवित रहे इसलिए अंगदान का निर्णय लिया।