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टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले 9वें मुक्केबाज बने मनीष, ऑस्ट्रेलियन को हराया

Thu, 12 Mar 2020 10:53 AM IST
खुशबू गोयल संजीव पंगोत्रा, चंडीगढ़
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बॉक्सर मनीष कौशिक - फोटो : फाईल फोटो
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चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज के छात्र रहे मुक्केबाज मनीष कौशिक ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्थान पक्का कर लिया है। उन्होंने 63 किलो भार वर्ग में आस्ट्रेलिया के हैरिसन गरसिडे को हराकर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। इसके साथ वह ओलंपिक में जगह पक्की करने वाले नौंवे भारतीय मुक्केबाज बने।
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क्वालीफाइंग में मनीष कौशिक ने राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन और दूसरी वरीयता प्राप्त गारसाइड को 4-1 से हराकर पहली बार खेल महाकुंभ में जगह बनाई। भारतीय मुक्केबाज ने शुरू से आक्रामक रवैया अपनाया और ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी पर करारे प्रहार किए, जिससे उनका खून भी निकल आया।

क्वालीफाइंग राउंड में कौशिक और विकास के अलावा जिन भारतीय मुक्केबाजों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है, उनमें एमसी मेरीकॉम (51 किग्रा), सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), पूजा रानी (75 किग्रा), अमित पंघल (52 किग्रा), आशीष कुमार (75 किग्रा) और सतीश कुमार (91 किग्रा से अधिक) शामिल हैं।
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2015-16 में एसडी कॉलेज के छात्र रहे

ओलंपिक मे क्वालीफाइंग करने वाले मनीष कौशिक मूल रूप से भिवानी के देवसर गांव के रहने वाले है। मनीष ने 2015-2016 में चंडीगढ़ स्थित एसडी कॉलेज सेक्टर-32 में बीए प्रथम वर्ष में एडमिशन ली। इसके बाद बीए सेंकेड ईयर में पढ़ाई करते हुए उन्हें सूबेदार की नौकरी मिल गई और वह फौज में चले गए।

एसडी कॉलेज मे पढ़ाई करते हुए उन्होंने पहले इंटर कॉलेज मे गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद इंटर कॉलेज में पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से खेलते हुए गोल्ड मेडल भी हासिल किया। मनीष के ओलंपिक क्वालीफाइंग करने पर एसडी कॉलेज के प्रबंधकों में खुशी का माहौल है।

मुक्केबाज विजेंद्र कुमार से प्रेरित होकर बॉक्सिंग के खेल से जुड़े
मनीष कौशिक इंटरनेशनल मुक्केबाज विजेंद कुमार से प्ररेति होकर मुक्केबाजी में आए। विजेंद्र की तरह मुक्केबाज बनने के लिए मनीष ने शुरुआती दिनों से कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी थी। चंडीगढ़ के सीनियर मुक्केबाजी कोच भगवंत सिंह ने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी में मनीष ने ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी का कैंप मेरे अंडर ही लगया था।

कैंप के बाद पीयू की ओर से बीएचयू बनारस यूनिवर्सिटी में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में खेलते हुए गोल्ड जीता और पीयू की टीम को ओवरऑल विजेता बनाने में अहम भूमिका भी निभाई।

मनीष को मिला ओलंपिक टिकट तो झूमे परिजन

एशिया ओसनिया ओलंपिक क्वालिफायर पुरुष वर्ग के 63 किलो भार वर्ग में भिवानी जिले के गांव देवसर के मुक्केबाज मनीष कौशिक ने जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज गारसिंडे को 4-1 से हराया परिजन और ग्रामीण झूम उठे। इस जीत के साथ ही मनीष कौशिक ने भी ओलंपिक का टिकट पा लिया है।

इस बार भारत के नौ मुक्केबाजों ने ओलंपिक क्वालिफाई किया है, जो रिकार्ड है। इससे पहले 2012 में सात मुक्केबाजों ने अपने मुक्कों के दम पर क्वालिफाई किया था और एक को वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी। इस बार ओलंपिक में भिवानी के तीन मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव, मनीष कौशिक और महिला वर्ग में पूजा बोहरा दम दिखाएंगी।

मनीष कौशिक ओलंपिक क्वालिफायर के 63 किलो भार वर्ग में सोमवार को हुए अपने मुकाबले में हार गए थे। लेकिन चार ही मुक्केबाजों को कोटा मिलने के कारण उन्हें एक और मौका मिला। जिससे में बुधवार को वे कामयाब रहे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन व दूसरी वरीयता प्राप्त मुक्केबाज गारसिंडे को 4-1 से हराया।
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मनीष कौशिक आर्मी में हैं

भिवानी के गांव देवसर में 23 वर्षीय मुक्केबाज मनीष कौशिक आर्मी में हैं और आर्मी की ओर से खेलते हैं। वे एशियन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट है। मनीष कौशिक ने 2019 में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज, कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल हासिल कर चुका है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज शिवा थापा को हराकर नेशनल चैंपियन बने थे।

माता रानी के दर्शन कर मांगी थी जीत की दुआ
मनीष कौशिक के पिता सोमदत्त शर्मा ने बताया कि बेटे की जीत पर गर्व है। वह 11 साल से मेहनत कर रहा है। आठवीं कक्षा में उसने बॉक्सिंग के ग्लब्स पहने थे। उसके जुनून को देखते हुए हमने भी पूरा सहयोग किया। अब जाते समय भी देवसर माता और हमारे आशीर्वाद लेकर गया था। हमें पूरी उम्मीद है कि वह ओलंपिक में भी शानदार खेलेगा।

पढ़ाई के साथ खेल का बिठाया तालमेल
मनीष ने दसवीं तक की पढ़ाई गांव से ही की और इसके बाद 12वीं तक की पढ़ाई भिवानी शहर से की। गवर्नमेंट कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। वर्ष 2016 में वह भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर भर्ती हुआ और अपनी बॉक्सिंग को निखारने में जुटा रहा। वह सुबह चार बजे उठकर बॉक्सिंग का अभ्यास करने जाता, ताकि पढ़ाई और खेल में तालमेल बना सके। इसमें परिवार का भी खूब सहयोग मिला।
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