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'इनसाइड द हार्ट ऑफ होप' बीमारियों से लड़ते इंसान के जज्बे की कहानी

Fri, 24 Jun 2016 08:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ में लेखक ऋषभ पुरी की किताब का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ स्थित ब्राउजर लाइब्रेरी एंड बुक स्टोर में लेखक ऋषभ पुरी की किताब 'इनसाइड द हार्ट ऑफ होप' का विमोचन किया गया। इंसान में कुछ कर दिखाने की इच्छा शक्ति हो तो वह हर प्रकार की बाधा को चीरता हुआ आगे बढ़ता जाता है। यहां तक कि वह इंसान आशावादी सोच के जरिए जिंदगी में नए मुकामों को भी हासिल करता है। लेखक ऋषभ पुरी ने उपरोक्त शब्द अपनी पहली पुस्तक इनसाइड द हार्ट ऑफ होप को ब्राउजर लाइब्रेरी एंड बुक स्टोर में लोकार्पण करते हुए कहे।
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प्रेस कान्फ्रेंस में पुस्तक के विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि यह पुस्तक दिल में उम्मीद रखने वाले एक ऐसे इंसान की कहानी बया करती है, जो तमाम मेडिकल विकारों से संघर्ष करके अपनी जिंदगी को एक नया रूख देता है। यह रचना उन लोगों की जिंदगी में नई उम्मीदें जगाती है जो अपनी जिंदगी से निराश हो चुके हो। 131 पन्नों की इस पुस्तक की शुरुआत एक डॉक्टर के कथनों से होती है जो कि रिक नाम केमरीज के इंतजर करने पर उससे क्षमा मांगता है।

रिक इस कहानी का मुख्य पात्र है जोकि बचपन से ही मेडिकल डिसऑर्डर से पीड़ित होता है। वह अपनी पहचान अपने नाम की बजाए अपनी बीमारी से कराता है। यह पुस्तक एक ऐसे इंसान की कहानी पर आधारित है जो धीरे-धीरे अपनी सोच में परिवर्तन लाता है और अपने भीतर के हुनर को पहचानकर जिंदगी को खुशियों से भर लेता है। 29 वर्षीय ऋषभ पुरी की यह रचना उनकी वास्तविक जिंदगी पर आधारित है।
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अपनी जिंदगी के लम्हों को शब्दों में पिरोने और उसे जगजाहिर करने की प्रेरणा उन्हें स्वयं से मिली है। 6 से 20 वर्ष तक चंडीगढ़ और दिल्ली के कई अस्पतालों में उनका इलाज चला। दो हार्ट सर्जरीज केबाद भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। उन्हें अपने परिवार व मित्रों से भी पूर्ण सहयोग मिला। इस अवसर पर कालका के एसडीएम आशुतोष राजन विशेष मेहमान के तौर पर उपस्थित थे। ऋषभ पुरी ने बताया कि वह वर्तमान समय में फलाइंग विदआउट विंग्स नामक पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं।
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