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बंद हवा खुली खिड़कियां और अग्निपथ के राही का विमोचन, जरूर पढ़ें

Sun, 07 Aug 2016 06:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किताब का विमोचन - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में बंद हवा खुली खिड़कियां और अग्निपथ के राही नामक दो किताबों का विमोचन हुआ। किताबों के शौकीन हैं तो पढ़ें। लड़कियों को कुछ करने से पहले यह भी साबित करना पड़ता है कि वे उस कार्य को करने में सक्ष्म हैं या नहीं। यह कहना है दैनिक ट्रिब्यून की पूर्व साहित्य संपादक और लेखिका डॉक्टर रेणुका नैय्यर का।
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रविवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में उनकी दो रचनाओं बंद हवा खुली खिड़कियां और अग्निपथ के राही का विमोचन हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन साहित्यिक संस्था शब्द लोक द्वारा किया गया था। इस अवसर पर डॉक्टर वीरेंदर मेंहदीरत्ता. डॉक्टर  आत्मजीत, डॉक्टर  लालचंद गुप्त मंगल, डॉक्टर  प्रसून प्रसाद विशेष तौर पर उपस्थित हुए। 

40 वर्ष पत्रकारिता में कलम की जिंदगी बिताने वाली डॉक्टर रेणुका नैय्यर ने लगभग डेढ़ वर्ष की अवधि में साहित्य जगत को कहानी संग्रह, कविता संग्रह के साथ-साथ  चर्चित उपन्यास न्यूजरूम दिया। एक खास बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी के कुछ लम्हों को साझा किया-
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डा. रेणुका का जन्म पंजाब के लुधियाना जिले में 1950 में हुआ था। हिंदी और संगीत में एमए करने के बाद उन्होंने बीएड की। उसके बाद उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। इसके अलावा उन्होंने नारी स्वतंत्रता और सामाजिक तनाव विषय पर डा. वीरेंद्र  मेंहदीरत्ता के मार्गदर्शन में पीएचडी भी की। उन्होंने अपने थीसिस के बारे में बात करते हुए बताया कि इसमें उन्होंने महादेवी वर्मा, ममता कालिया और शशि प्रभा का इंटरव्यू किया था।

द ट्रिब्यून ग्रुप ऑफ पब्लिकेशंस से जुड़ने वाली पहिली महिला पत्रकार
1978 में द ट्रिब्यून ग्रुप ऑफ पब्लिकेशंस में वे पहली महिला पत्रकार थी, जोकि सबसे पहले दैनिक ट्रिब्यून के डेली एडिशन को संभालती थी और फिर मैगजीन एडिटर के तौर पर वह सेवानिवृत हुईं। उन्होंने अपनी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस समय ट्रिब्यून समेत और भी कई समाचार पत्र महिलाओं को इम्पलाई रखने से हिचकिचाते थे। उस समय महिलाओं को खुद को साबित करना पड़ता था, भले ही वें पुरूषों की तुलना में कहीं बेहतरीन होती थी।

इन अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है-
1992 में डॉक्टर रेणुका नैय्यर को ऑल इंडिया न्यूजपेपर्स फेडरेशन अवॉर्ड मिला। 1998 में सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता के लिए बलराज साहनी नेशनल अवॉर्ड से भी वह सम्मानित की जा चुकी हैं। 2009-10 में साप्ताहिक कॉलम आधी दुनिया के लिए डॉक्टर रेणुका नैय्यर को यूएनएफपी लाड़ली राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। सन 2010 में साहित्य सभा कैथल द्वारा उन्हें  सुश्री महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान मिला था। चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा 2013 में उन्हें  साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया था।
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