चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में राजकमल प्रकाशन के किताब उत्सव के चौथे दिन कई कार्यक्रम हुए। कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों की पंजाबी भाषा में कथा वाचन प्रतियोगिता से हुई। सत्र का संचालन बिटटू सफीना संधू ने किया।
कार्यक्रम के आखिरी सत्र में भगत सिंह को फांसी के संदर्भ में भगत सिंह का सपना और हमारा वर्तमान विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। सत्र में प्रोफेसर चमनलाल, राजवंती मान, कंवर संधू और सुरजीत सिंह वक्ता के रूप में मौजूद रहे। प्रो. चमनलाल ने क्रांतिवीर भगत सिंह में संकलित पत्रों और लेखों के लिए रिसर्च करने के अनुभवों पर बात की। उन्होंने भगत सिंह के जीवन के उन अनछुए पहलुओं पर चर्चा की जिनके बारे में अक्सर बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने बताया कि उस दौर में लोग भगत सिंह के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त करते थे और उनके बारे में क्या सोचते थे। वहीं, सुरजीत सिंह ने बताया कि अपने नायकों को हम एक ऐसे खांचे में बिठाने की भूल कर देते हैं जिसमें रहते हुए हम उन्हें एक सामान्य मानवीय दृष्टि से नहीं देख पाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे बहुत कम लोग हैं जिनसे हम इस तरह से जुड़ पाते हैं और भगत सिंह उनमें से एक हैं। वह भारत को जोड़ने और एक करने वाली बड़ी हस्तियों में से एक हैं।
कंवर संधू ने कहा कि भगत सिंह अपने निश्चय के प्रति प्रतिबद्ध थे और उन्होंने अपने आप को इस कठिन रास्ते पर चलने के लिए तैयार किया था। राजवंती मान ने बताया कि भगतसिंह अपनी फांसी को लेकर भी उत्साहित थे। वह कहते थे कि इस दुनिया को मैंने देख लिया है। अब मैं आगे की दुनिया देखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि भगतसिंह एक ऐसी शख्सियत है जिसे किसी एक भाषा या क्षेत्र में नहीं बांधा जा सकता है। अगले सत्र में बिट्टू सफ़ीना संधू के कविता संग्रह सोनाशा के आवरण का लोकार्पण हुआ।